Friday, 16 December 2011

dost. (written by unknown0


कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं
कह देना कोई ख़ास नहीं.

एक दोस्त है कच्चा पक्का सा
एक झूठ है आधा सच्चा सा
जज़्बात को ढके एह पर्दा बस
एक बहाना है अच्छा अच्छा सा

जीवन का एक ऐसा साथी है
जो पास होकर भी पास नहीं
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं
कह देना कोई ख़ास नहीं.

हवा का एक सुहाना झोंका है

कभी नाज़ुक तो कभी तूफ़ान सा
शक्ल देख जो नजरे  झुका ले
कभी अपना तो कभी बेगाना सा

ज़िन्दगी का एक ऐसा हमसफ़र
जो समंदर है पर दिल के पास नहीं
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं
कह देना कोई ख़ास नहीं.

एक साथी जो अनकही कुछ बाते कह जाता है

यादों में जिसका धुंधला चेहरा रह जाता है
यू तो उसके न हनी का कुछ गम नहीं
पर कभी आंसू बन गिर जाता है

यूँ रहता तो मेरे तसव्वुर में है
पर इन आँखों को उसकी तालाश नहीं
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं
कह देना कोई ख़ास नहीं.


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