Saturday, 21 May 2011

khalbali

khalbali hai khalbali
khalbali hai khalbali hai
khalbali hai khalbali
khalbali hai khalbali

Thursday, 19 May 2011

school life in JDTS

याद है तुम्हें वो
समोसे की दुकान
वो भीड़ की खुशबु
वो नीम का पेड़
जहाँ घंटी बजती थी
और तुम और मैं
रोज मिलते थे
बरसात के दिन
जब घुटने तक पानी मे
हम हाथ में
हाँथ डाले
तरते चले जाते थे
याद है तुम्हे
अपने स्कूल का दरवाजा
जहाँ हम सब सर झुकाये
आते , जाते थे
और तुम मेरा हाँथ थामे
दुनिया से टकराते थे
आओ आज फिर
मिलकर याद करले
वो बीते पल
वो हसना वो खिलखिलाना
वो बेमतलब का झगरना
वो भीड़, वो लोग,
वो समोसे की भूरी आंख
वो पानी का नलका
बूडे पंखे की आवाज में
 जब हम गर्मी गिनती थे




Tuesday, 17 May 2011

बेचैनी

आज फिर  दिल में एक अजीब सी बेचैनी है, डर लगता है मुझे अपनी इस बेचैनी से! मुझे नहीं कहना है, की कोई मुझे समझता नहीं है,, मुझे बस अपने आप को समझना है
वह क्या है की जिसकी मुझे तलाश है, वो क्या है जो दूर  खड़ा मुस्कराता है , मुझे अपनी तरफ बुलाता है, कहीं वह मौत तो नहीं ,मौत भी हो तो इतनी हसींन  क्यों दिखती है, क्या इस लिये की अभी मेरे पास नहीं
मुझे बस अब सिर्फ शांति चाहिए , किस दूकान पर मिलती है, क्या पैसे से खरीदी जाती है,