Wednesday, 31 August 2011

दिल ने फिर याद किया

 दिल के कोने में
रखा है उसको
धरकनो में छुपा कर
जमाने से बचा कर
चाहा है उसको

दिल को क्या मालूम
दुनिया की इज्जाज़त
है लेनी
हर बार धरकने
की कीमत है देनी

दिल तो सिर्फ दिल है
धरकने की गलती कर बैठा
बेवजह मुश्किल में पड़ा
मरने की गलती कर बैठा

आओ सो जाओ मेरे दिल
मेरी गोद में आकर
कल निपट लेंगे दुनिया से
हम दोनों मिलकर




Tuesday, 30 August 2011

wishes


when your wish and my wish
are not fulfilled,
where do they go?
do they break and disappear
or do they fly here and there?
they must have become clouds
or may be stars,
they must have flown  by
might have shaken hands
or a peck on the cheek
do they talk to each other?
maybe promised to meet
what do they say?
How do they talk?
they must have said....
I am a wish
and so am I
so why are you here?
coz I am unfulfilled.
at least they are similar
atleast they are together
because they both are
unfulfilled wishes



Monday, 29 August 2011

इंतज़ार

और कितना प्यार करूँ
और कितना, इंतज़ार करूँ
 मालूम है, तू न लौटेगा कभी
रोज चाँद को क्या बताया करूँ

poetry by gulzar


ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा
क़ाफिला साथ और सफ़र तन्हा

अपने साये से चौंक जाते हैं
उम्र गुज़री है इस क़दर तन्हा

रात भर बोलते हैं सन्नाटे
रात काटे कोई किधर तन्हा

दिन गुज़रता नहीं है लोगों में
रात होती नहीं बसर तन्हा

हमने दरवाज़े तक तो देखा था
फिर न जाने गए किधर तन्हा