Friday, 23 September 2011

हम-तुम

लहू का रंग आज बदल गया
तेरा साथ क्या छूटा की मै बदल गया 
फिर से मिलने की आस में साँस है चलती 
फिर एक बार,यादों का मौसम बदल गया

एक एसी   प्यास है की जली  जाती है
धूप है , की घनेरी घटा छाई है
मैं और तुम खडे हैं चुपचाप
जिंदगी ने कहीं जाने की कसम खाई है




Wednesday, 21 September 2011

तुम ठीक तो हो ????

मन बड़ा बेचैन सा है
कभी इधर बेठता है
कभी उधर चुप चाप रोता है
खिड़की से झांक कर जाता है
कहता है तुम ठीक तो हो ?

मैं भी यूही दिन रात
मुसाफिर बनी अपने ही घर में 
घुमती हूँ.
रोज चाँद को आते और 
सूरज को जाते देखती हूँ

कभी दो पल मिलते हैं
मैं और मेरा मन
हंस कर टाल  जाते हैं
पलकों के आंसु को
तिनका कर देते हैं.

और पूछते हैं सबसे
तुम ठीक तो हो ????




Tuesday, 20 September 2011

हम तुम

सुखे पत्तों की तरह उड़ गये हम तुम
प्यासे नैनो में भीगे हम तुम
आओ खेले जीवन की हथेली पर
कल और आज के कठपुतली हम तुम






Monday, 19 September 2011

अब जो कर दी जिंदगानी तेरे नाम,
बोल और क्या चाहिए मुझसे तुझको

मिलेंगे फिर कभी हम अगले जीवन में
आखरी  रात  बस सो लेने दे मुझको

याद कर सको तो इतना ही करना
की इश्क के हर रस्म हमने निभाई है

यह अलग बात है, की पूरी नहीं अधूरी है
कहानी तो हर आंसू ने गिर गिर कर सुनाई है



रगों में दौरते, फिरने के हम नहीं कायल
जब आँख से ही न टपका तो फिर लहू क्या है ......

Sunday, 18 September 2011

दिल ने फिर याद किया ....

कतरा कतरा जल  चुका दिल 
बस तुम्हारी याद में

अब धरकना  छोड़ चुका दिल
बस तुम्हारी याद में

हम तो बेठे ,हैं इंतज़ार में
थक न जाये रात-दिन


मुझसे  न पूछो हाल मेरा
मेरी तो  कोई बात नहीं


समझा तो  दो आकर जरा 
तुम्ही दिन-रात को


नहीं आओगे मिलने तुम
आया न करे दिन-रात, भी


कतरा कतरा जल  चुका दिल 
बस तुम्हारी याद में