Thursday, 29 September 2011

नींद और मौत

नींद और मौत में फर्क
सिर्फ इतना है
कभी कभी जागे हम 
कभी सिर्फ़ सोना है 

की आज आकर उठा न पाओगे हमे
की सो चुके हैं हम
कल तुम जो जागो नींद से 
गुजर चलेंगे हम


मुश्किल में पड़ा है दिल इस बात पर
देंगे किसे अपने गम जो न रहे हम
रोना नहीं , मेरे लिए, मेरे दोस्तों
यहीं कहीं यादों में मिला करेंगे हम









Wednesday, 28 September 2011

हम तुम

हम तुम

धूप  की बातों की तपिश
तुम्हारे लबों की ओस में
लम्बी जुल्फों की छांव में
ठंडे से  पड़ जाते हैं

और मैं चुपचाप सोंचता हूँ
की यह तपिश,यह ओस,और यह छाव
सब तुमसे मिलने का बहाना
कर आते जाते हैं

जिंदगी की घनेरी  धूप   में
एक तुम्ही ही तो हो
छाँव देती, मुस्कराती
आहें भरती और खिलखिलाती

और मैं चुपचाप यह सोंचताहूँ
की यह धूप,  यह आह ,यह मुस्कान
सब तुमसे मिलने का बहाना
कर आते जाते हैं

कभी ऐसा हो ,एक दिन
की मैं और तुम,
यह धूप ,छांव आहें मुस्कान
को गली की नुक्कर्ड पर छोड़ 
कहीं दूर जा 
दो प्याली चाय पियें 
बस हम तुम












हम-तुम


एक टुकड़ा जो तुमने लिया था
रखा है या, खो दिया
हम तो बेठे हैं लेकर अपने
दिल के आधे टुकडे को.........

एक जो मेरा सपना था
सपने में तुम रहते थे 
हम तो बेठे हैं लेकर अपने
टूटे,  बिखेरे सपने को

प्यार है तुमसे, कहती  हूँ मैं
तुम भी कुछ तो बोलो न
हम तो बेठे हैं लेकर अपने
अरमानो की झोली को

Tuesday, 27 September 2011

मैने कब माँगा की तुम मेरी हो
और मैं तुम्हारा होऊं
गैर न हो जाओ
इस बात की चिंता है......

Dharkan

एक धरकन आज जरा कम होगी 
दिल से कुछ भार उतारा है तुमने
एक धरकन आज चैन से सो जाएगी
फिर प्यार से प्यार को बुलाया है तुमने


Monday, 26 September 2011

kabhi Kabhi

I saw the song today after so many years, the song is picturised so beautifully. I felt the pain of a lost love. My god, how do people live, why do people live? after loosing somebody special.