Wednesday, 12 October 2011

हम-तुम

तुम आँखों को बंद न करना
मैं छलक के फिसल जाउंगी.........
जागती आँखों का सपना हूँ मैं
तुम जो, सो  गये तो कहाँ जाउंगी......








दिल

दिल को फिर दिल से बात कर लेने दो
आज रोको नहीं मुझको प्यार कर लेने दो

अंजाम क्या होगा फिर बैठ के सोचेंगे
अपनी बाँहों के घेरे में सो लेने दो

तुम जो दूर हो मुझसे बहुत दूर
आओ मुझको अपनी सांसो से छू लेने दो





प्यार

तुमने ही तो कहा था तब
की प्यार है मुझसे
अब और, कहाँ जाएँ 
और क्या बात करें...........