Friday, 21 October 2011

हम-तुम

तुम भी तो कुछ कम नहीं
रोज आते रहे , मुझे उठाते रहे
गिर गिर के उठाना
उठ कर चलना
रोज युहीं सिखाते रहे

चलना  है दूर तक
समझता हूँ मैं
गिर गिर के
संभालना है
समझता हूँ मैं

डर है बस इसका की
मैं गिरू और तुम न आओ
मैं चल न पाऊ और
तुम चले जाओ


इस बात का डर है
बस इस बात का डर है...........




The journey of life.

I have always thought on the airports when i am all alone in the crowd, that we all are going in the same plane(destination) yet we dont even know each other. we try our level best not to even see the person sitting next to us . so many souls cross your path and disappear, only few, come closer to you and some are very close, i wish there was this friend, whom i could tell about what i know about myself, as if i had always wanted to climb myself down the throat into the belly and look around myself.
this journey of mine, is standing on a crossroad, I want to choose a road, of my wishes, or is it pre-written destiny, if it is pre-written, why do we put so much effort , in living this pre-written life???? weird na.

Thursday, 20 October 2011

हम-तुम

क्या कहूँ तुमसे, तुम सुनो तो सही
दिल मेरा हर वक़्त धरकता रहता है...
जमाने ने बताया मुझे की तुम खुदा हो गये
कल रात, फिर सपने में कौन आया है.....




Wednesday, 19 October 2011

किस्से

कह तो दिया, की मुझको नहीं
मतलब जमाने से
यह हर रोज मुझे किस्से 
बताती क्यूँ हो?
हर किस्से  का अंजाम मुझे 
मालूम है
रोज वोही किस्से 
तुम बदल के सुनाती क्यूँ हो/



Monday, 17 October 2011

tum aur main

कह दो मुझे की न जाऊं  मैं तुम्हारे पास
कह दो मुझे की याद भी न करूँ तुम्हे
कह दो मुझे की भूल जाओगे तुम भी
कह दो मुझे की साँस भी न लूं आज से....