Thursday, 24 November 2011

धड़कन

धडकने जब आपस में बात करती हैं
बेहिचक तुम्हारा नाम जपती हैं
मैं जो कह दूं ,  छोड़ो,अब बहुत हुआ
मुझमे रह कर मुझसे  ही बगावत करती हैं.





Wednesday, 23 November 2011

खवाब ही हो तुम,

खवाब ही हो तुम,
नहीं, तो कहो.
क्यों भोले से लगते हो
प्यारी बातें करते हो
धडकनों  से खेला करते हो
सुबह की आगोश में जाने
कहाँ सोते हो
नींद सी बोझिल आँखों में
रात होते ही, पलकों पे आ जाते हो
मन तुमसे मिलने को
रोज व्याकुल  रहता है
ख्वाब हो तुम , आओगे  आज
येही सोंच कर सोता है
सुबह सवेरे उठाते ही
पहली मुस्कान बन जाते  हो
ख्वाब ही तो हो तुम
पर कहो
रोज क्यूँ नहीं आते हो?











जिंदगी

अच्छा है ,जिंदगी भगदर में कट रही
होते दो पल, जो मेरे पास ,तो  याद आते तुम.......

Monday, 21 November 2011

जिंदगी अब तो पता दे अपना.........

बहुत प्यासा हूँ ,बहुत भूखा हूँ
बहुत भटका हूँ, बहुत तडपा हूँ
बस तुझसे मिलना है बाकी
जिंदगी अब तो पता दे अपना.........