Monday, 17 December 2012

मेरा चेहरा

मुझको था गुमान की मुझसा कोई नहीं
 भीड़ में कैसे तुमने मेरा चेहरा देखा???? (वंदना)




हम तेरे दर पर आकर 
फिज़ा में तेरे दर्द खोजतें हैं।।। (वंदना )

Sunday, 2 December 2012

जिंदगी और "बन्ना "


लहू ने  पूछ लिया की अगर बह सकूँ मैं
तो तुम मुझे रोक तो नहीं दोगी "बन्ना "??

हर नली , हर मोड़ पर कितनी तेज़ी  है
तेरे--मेरे  दिल पर आकर क्यूँ रूकती है भला??

यह तो मालुम था की मरना है एक दिन मुझको
रोज मरना है,  किसी ने कहा न था

देखते देखते बदल बैठी दुनिया
इतनी तेज़ी से तो आसमान भी झुका न था

तुम कहते हो की जो होगा सो देख लेंगे
आँख में आंसू के सिवा कुछ बचा न था

मैने पूछ  लिया बदलती हुई जिंदगी से
तू जो चलती है तो मुझको भी साथ लेती है क्या???



Saturday, 1 December 2012

anaam

"वास्ता हुस्न से या शिद्दत ए ज़ज्बात से क्या ,
इश्क को तेरे कबीले या मेरी जात से क्या ,
मेरी मसरूफ तबीयत भी कहाँ रोक सकी ,
वो तो याद आता है उस को मेरे दिन-रात से क्या ,
प्यास देखूं या करूँ फ़िक्र कि घर कच्चा है ,
सोच में हूँ कि मेरा रिश्ता है बरसात से क्या ,
अब वो कहता है के क्या लोग कहेंगे कल को 
कल जो कहता था मुझे रस्मे रिवायात से क्या..." (Anaam)

Friday, 30 November 2012

तनहा लोग


हुई मुश्किल की, भीड़ भरी दुनिया  में 
लोग,  तनहा से जीते और मरते रहते हैं 

Wednesday, 28 November 2012

अंतर्द्विन्ध्

अंतर्द्विन्ध्

अब कुछ नहीं कहूँगी
कुछ भी नहीं
मैं बिलकुल चुप रहूंगी
बिलकुल
सांस भी नहीं लुंगी
बिलकुल नहीं
तुम देखना , मैं जी लुंगी
एकदम
सांसो में तुमने जाल बिछाया है
गहरा
आँखों से आंसू मेरे बहेंगे
हाँ बहने दो
दिल को बंद करना है
निसंकोच करो
भूल जाउंगी तुम्हे
जल्दी करो
अब तुम भी कुछ मत कहो
अच्छा
अब तुम भी चुप रहो
बिलुकल
मेरी दिल की हलचल में
तुमको चुप होना होगा
मैं जब दिल से बात करूँ
तुमको जाना  होगा .....




Tuesday, 27 November 2012

The main barriers of listening



Just  had written  this on my blog and wanted to share it here ,  just wrote what came in my mind . The main barriers  of listening are noise, tiredness, being judgmental, own mind in solution mode. I feels it is  difficult to drop everything which your mind is thinking and almost magically visit somebody else's world, see through their eyes, and listen what they want to say , after all "listen" is an anagram of"Silent". be silent, but attentive, don't speak in between, don't interrupt, don't ask too many questions, don't change the subject, don't give your point of views.

Monday, 26 November 2012

तू साथ, चल तो मेरे,

तू साथ, चल  तो  मेरे,
गम की जमीं बाँट लेंगे
गीला गीला आसमान ओढ़ लेंगे
कभी  खुल के हंस लेंगे
कभी घुट के रो लेंगे
तू साथ तो चल मेरे
कभी अंधेरे से निकल कर
रौशनी पकड़ कर
हम दौडते फिरेंगे
तू साथ चल तो मेरे



Saturday, 24 November 2012

साया


घर की दीवार पर  चढते अपने साये को 
धुप ढलते ही जमीन पर बिखरते देखती हूँ 

Friday, 23 November 2012

उसकी याद

थोड़ी सी जमीं , थोड़ी आसमां पर
बिना पंख के उडती रहती हूँ
मैं, उसकी , याद हूँ,  उससे  दूर
हर सुबह जीती हूँ सांझ ढले मरती रहती हूँ (वंदना)

Tuesday, 20 November 2012

बेवफाई


बेवफाई 

बेवफाई का भी ,एक हसीं मौसम जरुर होगा 
की अक्सर लोग नजरें बचा कर जीने लगते हैं।






Saturday, 17 November 2012

हलचल पूछ बैठी

दिल से मेरे, एक अजनबी सी  हलचल पूछ बैठी
धरकन तेरी आज इतनी खामोश सी क्यूँ है ????


Thursday, 15 November 2012

कहाँ पढ़ा था तुम्हे, कुछ याद नहीं
दिल में ही रहो अखबार न बनो
(वंदना)

धनक


मजबूर है यह बादल बरस जाने को
फूल भी बेचैन है आज कल में खिल जाने को

तितलियां उडती हैं मस्त फिजाओं में
चिड़ियों ने राह पकड़ी है हवाओं में

एक मैं हूँ की तेरी आस में बैठी  हूँ
सब तो खुश हैं बस मैं उदास बैठी हूँ

मेरे ख़्वाबों से निकलता तू और उतरता जमीं पर
धनक बन गया न जाने कब , बादलों में छुप कर







Wednesday, 14 November 2012

कुछ यूहीं

हर सांस की कीमत अगर अता होती
जिंदगी जीने की वजह भी एक दुआ होती

मुझको आती है हँसी अपनी तक़दीर पर
मिल जाया करती  है मुझसे सपनो की देहलीज पर

क्यूँ चले आते हो रोज ? तुम  थक जाओगे
ख्वाब में आते-जाते,कही तुम बिखर जाओगे 




Sunday, 11 November 2012

तुम्हारा नाम तो मीत है न ?????


मैं पूर्ण-विराम की कैद में बंद 
शब्दों की पंक्तियों से  रचित 
व्यक्त होने  को व्याकुल 
गुमनाम सी अनुभूति हूँ 
मेरा नाम नीर है
तुम्हारा नाम तो मीत है न ?????

Happy lonely Diwali Banna 2012


तुम कहती हो तो चुप रह के देखती हूँ कुछ दिन
अगर याद आए मेरी, तो बहारों से पता पूछ  लेना।
मेरे हर दर्द  के असहाय साखी है फिजा
अपने हर रंग में छुपा कर रखा है  मुझे

Saturday, 10 November 2012

मेरे दोस्त,

शब् के आंसू जो  कभी बह गए
लबों पे तेरी, रुके , तो हंस सके।।।
युही आंसुओ को हंसी में बदल सको तो चलो
मेरे दोस्त, दर्द की हर  दिल्लगी को समझ सको तो चलो।

Sunday, 4 November 2012

क्या जिंदगी जी गए हम -तुम ?

कहूँ मैं क्या अब तुमसे
इस दुनिया में यह कहावत पुरानी  है
क्या जिंदगी जी गए  हम -तुम ?
या  दूर खड़ी वो हमे बुलाती है



तेरा इंतज़ार

चलो फिर "आज" को अपने पहलू में सुलाया जाए
थक के चूर है तेरा इंतज़ार करके ......

Saturday, 3 November 2012

मुखोटे



मत सोचो, मत देखो मुखोटों के उस पार
लोग हर वक़्त नए वस्त्र बदलते रहते हैं ..

कितने चैहरे हैं  हँसते,  तस्वीरों से
कितना  रोते हैं, कितना  बिलखते रहते  हैं .............

चाँद और मैं।।।।।

कल जब  छत पर सबकी  तू  उतर आया  चाँद
कितनी प्यासी आँखों ने तुझे  सर पर बिठाया होगा ???

एक मैं हूँ की हर  हाल में तुझे प्यार करती हूँ
तारीखों की बंदिश में बंधने से हमारा क्या होगा ???





Friday, 2 November 2012

मदिरा को नशा करा सके कोई

मदिरा को नशा करा सके कोई 
पत्थर से नीर बहा सके कोई
मेरे दिल से तुझे हटा सके कोई
मुझे ऐसे, किसी की तलाश है




Tuesday, 30 October 2012

तुम्हारी याद


कोट की जेब में उंगलियों में ऊँगली उलझाती
सर्दी की सर्द हवाओं में कंपकंपाती
ठिठुर कर फिर  पास सिमटती जाती है
तुम्हारी याद

नए से शहर में दूर तक  जाती
कभी भीड़ में गुम हो जाती
कभी अंधेरे से  डर कर  लौट आती है
तुम्हारी याद

गले में मफलर सी लिपट सीने तक लहराती
कभी कानो पर  गर्म हथेली बनती
कभी बियर की बोतल पर ठंडी बूँद बन कर उतरती है
तुम्हारी याद



 




Wednesday, 24 October 2012

सरसराती हवा कोई गीत सुनाती है

सरसराती हवा तुम्हारे   गीत सुनाती है

गीत जो आज कल तुम नहीं गुनगुनाते
बस मन में कहीं लिख कर रख देते हो
और जब मन  अशांत हो फडफडाता  है
तो तुम उस कोने में छुपने की कोशिश में
गीत को रिहा कर देते हो
तुम्हारे गीत ,स्वतंत्र हो हवा में गुनगुनाते हैं

और मैं फिर से लौट पाने की कोशिश में
दिल के किसी कचोट में  खुद को तलाशती फिरती हूँ
जहाँ एक दिया सा धुकधुकाता  है
बुझ जाने की कोशिश में  फिर से जलता  रहता  है
और जब हवा की सरसराहट पास से गुजरती है
तो मैं जान जाती हूँ की तुम्हारे गीत आज आजाद हैं
और मैं उस दर्द  से निकल तुम्हारे गीत ढूँढती हूँ

यह वही गीत हैं जो तुमने अभी लिखे नहीं
केवल सोचें हैं।
पर फिर कैसे सरसराती हवा तुम्हारे  गीत सुनाती है????








Tuesday, 23 October 2012

आज फिर एक सुहाना सा  सपना देखा
खुद को सपने में भी बड़ा तनहा पाया

घंटों, भीड़ में  घुमते  रहे हम-तुम
हाँथ जब तुमने छोड़ा मेरा तो, तनहा लगा

एक उम्मीद है की फिर से जी लूँ वो पल
कितनी मुद्दत से वो पल अकेला रहा

Sunday, 21 October 2012

आबले सीने के उबल कर

आबले सीने के उबल कर
आसमा में पहुंचे तो बरसात हुई

तुमसे तो मिलती रही  ख़ुशी
हमको  गम से लम्बी मुलाकात हुई

आज का दिन भी युही किनारे पर सो गया
हमको तुमसे मिलने की झूठी आस हुई




Sunday, 14 October 2012

चुप हो गए हैं आस

चुप हो गए हैं आस मेरे, शब्दों में ढल कर
जहन में रहते थे, मेरे कितने शान से ।।।। (वंदना )

Tuesday, 9 October 2012

mithoo got his PhD.

 My Mithoo got his PhD  such a proud feeling. heaviness in chest with love and pleasure. Please God, take care of him. he is such a sweet kid.

Monday, 8 October 2012

तुम लौट आओ

वो पुरानी गलियां भी याद आतीं हैं कभी???  
तुम्हारा साया वहां नाराज सा मिला था मुझे।।

देख कर मुझको और मेरे साए को
 तेरा साया ठिठक कर रुका तो था

मिल कर मेरे साए,से तेरा साया
 जमीन से आसमान तक चला तो था





Friday, 5 October 2012

"तुम्हारी याद" ...

सुबह आज देर से उठी है
लबों पर  एक अनदेखी मुस्कान लिए
दुपट्टा संभालती , यूही गुनगुनाती
अधरख की चाय में घुल कर
सुनहरी  धुप में बाल सुखाती
"तुम्हारी याद " आज खुश दिखती है 

रात के पिछले  पहर , में सिहर कर 
उठती ,फिर सो नहीं पाती
चाँद को बादल में छुपते -निकलते
देखती, मुस्करती ,  फिर आहें भरती
सुबह के इंतज़ार में जगती -सोती
"तुम्हारी  याद" आज दुखी दिखती है
और मैं , रोज  अपने दिल से कहती हूँ
की आज देखें किस "मूड "में उठेगी "तुम्हारी  याद" ...

Monday, 1 October 2012

अब तुम्हे रोज भुला कर देखते है न



हर तरफ शोर है, भीड़ है ,आपाधापी है 
कुछ रोज युहीं अकेले कहीं  रहते है न 
 

धुप जब भीगती है बारिश में यूँ 
सुनहरा रंग तो काला पड़ता  है न 

नींद मुश्किल से आती है कभी कभी 
कभी नींद से न जाग कर  देखते हैं न 

काफिले जातें है धुल की गुबार लिए 
धुल में तेरी तस्वीर बनाते है न।

मोहब्बत तो कर  ली हमने तुमसे 
अब तुम्हे रोज भुला कर  देखते है न 

Sunday, 30 September 2012

रात को सो न सकी मैं।।।।। randomites

मैने  ही चुन लिया "सांझ " का चेहरा
सुबह, मैं  उठ नहीं पाई, रात को सो न सकी मैं।

तुम्हारे बिन गुजारे हैं कुछ ऐसे दिन हमने
की हर सांस निकलती है  एक उम्र के बाद

तन्हाई मेरी उदास है ,तनहा जो रह गयी
हर लम्हा जो तुमको दे दिया अपने वजूद का 

Thursday, 27 September 2012

जो तुम उदास रहते हो

जो तुम उदास रहते हो
और मुझसे भी नहीं कहते
मेरे दिल की बैचेनी क्यूँ
कुछ ज्यादा शोर मचाती है?

जो तुम चुपचाप यूँ रो लो
और मुझे मालूम भी न हो
तुम्हारे  शहर का बादल क्यूँ
मेरे शहर में बरसता है ?

जो तुम्हारे सपने न पूरे हों
युहीं कभी जो अधूरे हों
मेरी खुली आँखों में क्यूँ
ख्वाब यूँ लहराता है .........












Sunday, 23 September 2012

मेरे खोए जज्बात , मेरी अनकही बातें


मेरे खोए जज्बात , मेरी अनकही  बातें 
कितने लोगों को मैने खुद सुनाई है
\
सुकून के पल में बसती तन्हाई है
मैने यह बात तुमको पहले भी बताई है

हर एक शक्श है गुम, खुद को पाने को
कैसी यह भीड़ है कितनी तन्हाई है

गुजरते वक़्त में खोए कुछ पलों में उतर
हम भी आज  थोडा सा  सुकून ढूंढ़ते हैं।   (वंदना)






                  

झुठ के पाँव नहीं होते

झूठ  के पाँव नहीं होते
झूठ अपने साए के साथ बराबर चलती है मगर
हम झूठ  में भी किसी दबे  सच को ढूंढ़ते हैं

वो समझते हैं की हमको मालुम नहीं
जो बीती है, वो  सच में बीत गयी है
फिर भी सीने में जलती है, उस  आज की आग

एक दिन मिल तो मुझसे,  कही तू  "खुदा"
तेरा बन्दा हूँ तुझसे  मिला चाहता हूँ
तेरी मर्ज़ी का चर्चा, नहीं करुँगी ,तेरी कसम

यूँ पाँव के कुछ घाव दिल से पूछ्तें हैं
तू  जो हर वक़्त दर्द में डूबा है , ये बता
यह जख्म भर तो जाएँगे  न कभी ????


Friday, 21 September 2012

akbar allahabadi

हंगामा है क्यूँ बरपा, थोड़ी सी जो पी ली है
डाका तो नहीं डाला, चोरी तो नहीं की है

ना-तजुर्बाकारी से, वाइज़[1] की ये बातें हैं
इस रंग को क्या जाने, पूछो तो कभी पी है

उस मय से नहीं मतलब, दिल जिस से है बेगाना
मक़सूद[2] है उस मय से, दिल ही में जो खिंचती है

वां[3] दिल में कि दो सदमे,यां[4] जी में कि सब सह लो
उन का भी अजब दिल है, मेरा भी अजब जी है

हर ज़र्रा चमकता है, अनवर-ए-इलाही[5] से
हर साँस ये कहती है, कि हम हैं तो ख़ुदा भी है

सूरज में लगे धब्बा, फ़ितरत[6] के करिश्मे हैं
बुत हम को कहें काफ़िर, अल्लाह की मर्ज़ी है

Thursday, 20 September 2012

कुछ इस तरह बरसा .

कौन सा साल था? कौन सा दिन ? कुछ याद नहीं..
तेरी यादों  का बादल  ,कुछ इस तरह बरसा ......

Wednesday, 19 September 2012

भूल जाउंगी मैं तुमको

भूल जाउंगी मैं तुमको भी, मुझको मालूम  है
एक जुर्म का हिस्सा है ,मेरी रूह और मैं।।।।।।।

Tuesday, 18 September 2012

मेरा अक्स

आयने से  निकल कर, मेरा अक्स
मुझे , अपने साथ लिये जाता है
 मैं जागती आँखों का सपना बन
 दूर तक, साथ उसके जाती हूँ
 आँखों की लम्बी एक टक नजर
 मुझको दर तक तेरे छोड़ जाती है
  दरवाजा खटका दूँ या चली आऊं वापस ?
 इसी पशो-पेश में हर बार सिहर जाती हूँ
 मेरी सिहरन से परेशान , मेरा अक्स
 शीशे में झिलमिलाता वापस चला जाता है
 और मैं बन-सवर कर, तेरी याद को
 ख़ूबसूरती से भूल जाने की कोशिश करती हूँ

Monday, 17 September 2012

kaifi aazmi

तुम परेशां न हो बाब-ए-करम-वा न करो
और कुछ देर पुकारूंगा चला जाऊंगा
इसी कूचे में जहां चांद उगा करते थे
शब-ए-तारीक गुज़ारूंगा चला जाऊंगा

रास्ता भूल गया या यहां मंज़िल है मेरी
कोई लाया है या ख़ुद आया हूं मालूम नहीं
कहते हैं कि नज़रें भी हसीं होती हैं
मैं भी कुछ लाया हूं क्या लाया मालूम नहीं

यूं तो जो कुछ था मेरे पास मैं सब कुछ बेच आया
कहीं इनाम मिला और कहीं क़ीमत भी नहीं
कुछ तुम्हारे लिए आंखों में छुपा रक्खा है
देख लो और न देखो तो शिकायत भी नहीं

फिर भी इक राह में सौ तरह के मोड़ आते हैं
काश तुम को कभी तन्हाई का एहसास न हो
काश ऐसा न हो ग़ैर-ए-राह-ए-दुनिया तुम को
और इस तरह कि जिस तरह कोई पास न हो

आज की रात जो मेरी तरह तन्हा है
मैं किसी तरह गुज़ारूंगा चला जाऊंगा
तुम परेशां न हो बाब-ए-करम-वा न करो
तुम परेशां न हो बाब-ए-करम-वा न करो
और कुछ देर पुकारूंगा चला जाऊंगा
इसी कूचे में जहां चांद उगा करते थे
शब-ए-तारीक गुज़ारूंगा चला जाऊंगा

रास्ता भूल गया या यहां मंज़िल है मेरी
कोई लाया है या ख़ुद आया हूं मालूम नहीं
कहते हैं कि नज़रें भी हसीं होती हैं
मैं भी कुछ लाया हूं क्या लाया मालूम नहीं

यूं तो जो कुछ था मेरे पास मैं सब कुछ बेच आया
कहीं इनाम मिला और कहीं क़ीमत भी नहीं
कुछ तुम्हारे लिए आंखों में छुपा रक्खा है
देख लो और न देखो तो शिकायत भी नहीं

फिर भी इक राह में सौ तरह के मोड़ आते हैं
काश तुम को कभी तन्हाई का एहसास न हो
काश ऐसा न हो ग़ैर-ए-राह-ए-दुनिया तुम को
और इस तरह कि जिस तरह कोई पास न हो

आज की रात जो मेरी तरह तन्हा है
मैं किसी तरह गुज़ारूंगा चला जाऊंगा
तुम परेशां न हो बाब-ए-करम-वा न करो
और कुछ देर पुकारूंगा चला जाऊंगा

और क्या है वंदना के बक्से में

 
स्कूल के भीड़ में घूमती रूह बंद है
तेजी से आँख के सामने से निकल जाती है ,
 
हर  एक दोस्त की हंसी कैद है ,
जो अब भी मन को खुश करती है
 
लम्बी सड़क पर हम-तुम जो निकल पडे थे
जाना तो याद है पर हम वापस  कैसे आये थे?
 
भोलापन जो था हमारे दिलों में था
वो अब भी  कभी कभी कहीं कहीं से झांकता है
 
पहले प्यार का पहला इंतज़ार अभी भी
दिल धरकाता है
 
दिल के टूटने की आवाज़ का शोर पड़ा  है
आंसुओ का गीलापन , सुख कर कोने में पड़ा है
 
स्कूल से "फुट" कर  कहीं भी  जाने
पर जो अपराध की भावना थी
वो भी बंद है
 
और यह सब तो सिर्फ उन दो साल की कहानी है... जब हम और तुम एक दुसरे को जानते थे........ याद का क्या??? इसे आदत है.. सब कुछ याद रखना..

Saturday, 15 September 2012

आदत

आदतन हम तो जी लेतें है तन्हाई के साथ
तुम जो भीड़ से निकलते हो तो क्या खोजते हो ???? 

Wednesday, 12 September 2012

जिंदगी जीने की आरजू नहीं रहती

जिंदगी जीने की आरजू नहीं रहती
अजनबी सी राहों का
अजनबी मुसाफिर सुन
जिंदगी जो मेरी है
यह जिंदगी जो तेरी है
यह तो एक कहानी है
कहानी में आते ही
कहानी से जाते ही
लोग याद रखते हैं
लोग भूल जातें हैं
कहानी में तनहा मैं
कहानी में तनहा तू
यूँ ही मर मर  कर
जिंदगी गुजारी है .

बादल नहीं, वो तेरा साया है।।।।।।।।

तेरी , खुशबू है हवाओं में
या फिजा ने इत्र लगाया है
आँखें बंद जो कर लूँ मैं
बादल नहीं, वो तेरा साया है।।।।।।।। (वंदना)

Tuesday, 11 September 2012

रेत पर लिख कर तुम्हारा नाम

रेत पर लिख कर तुम्हारा नाम
खुद ही हथेली से मिटा दिया था
डर था की समुंदर की लहर आती
और तुम्हे साथ अपने ले जाती

Sunday, 9 September 2012

कोई मेरा दिल चुरा कर चला गया

कोई मेरा दिल चुरा कर चला गया
कोई मेरे गीत गुनगुना कर चला गया
मैं कहाँ जाऊं, क्या कहूँ  क्या करूँ ??? ए दोस्त
कोई मेरे दिल पर हक जमा कर चला गया




तेरे बिना भी तो हम जी रहे थे कभी

  हर सांस में है तू, हर लम्हे में मोजूद
तेरे बिना भी तो हम जी रहे थे कभी

ME WHEN I AM JUST ABOUT TO GET DRUNK

आज यकीन हो गया की मिर्ज़ा ग़ालिब ने कितनी सारी  नज्म, गजल, पीने के बाद ही  लिखी होगी।। साली, हर पंक्ति पीने के बाद शाएरी जैसी लगती है।।।।

जैसे।।।।। अर्ज किया है।।।

होशो हवास गुल हैं
पर तुम खूब याद हो।।।।।।


या फिर।।।।।

लायी हैं रंग फिर से तेरी याद यूँ भी
दिखाई दिया तेरा चेहरा शराब में भी


या फिर।।

तुम मुझे भूल जाओ
मुझसे मिलो भी नहीं
हम भी मायूस से हैं
पर मजबूर नहीं।।।।।।

साला दीमाग है की।।। शाएरी उगलता है।।। I can talk shayeri... i can waLK SHAYERI.... I CAN LIVE SHAYERI.


HOPE YOU ARE OK BANNA TO REMEMBER ALL THIS...

चाँद कुछ तो कहता होगा न

जो चाँद दीखता है मुझे, वो तुझे भी दीखता होगा न
तड़प कर मेरी आहों से चाँद भी तो रोया होगा न
आई है रात जालिम सी , मैं चुप हूँ, मगर तू सुन ले
मेरा दिल पढ़ कर रातों को ,चाँद कुछ तो कहता होगा न (वंदना)



Saturday, 8 September 2012

एक एहसास

एक एहसास सा है तू दिल में समाया सा
हवा का झोका तू बन मेरे  दिल से निकल जा।।।।।

Friday, 7 September 2012

Javed Akhtar

मुझसे नाराज़ हो तो हो जाओ
खुद से लेकिन खफा खफा न रहो
मुझसे तुम दूर जाओ तो जाओ
आप अपने से तुम जुदा न रहो

मुझसे नाराज़ हो.....

मुझपे चाहें यकीं करो न करो
तुमको खुद पर मगर यकीन रहे
सर पे हो आसमान या कि न हो
पैर के नीचे ये ज़मीन रहे
मुझको तुम बेवफा कहो तो कहो
तुम मगर खुद से बेवफा न रहो

मुझसे नाराज़ हो.....

आओ इक बात मैं कहूँ तुमसे
जाने फिर कोई ये कहे न कहे
तुमको अपनी तलाश करनी है
हमसफ़र कोई भी रहे न रहे
तुमको अपने सहारे जीना है
ढूँढती कोई आसरा न रहो

मुझसे नाराज़ हो तो हो जाओ
खुद से लेकिन खफा खफा न रहो
मुझसे तुम दूर जाओ तो जाओ
आप अपने से तुम जुदा न रहो..!!
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                      --Javed Akhtar
तुमसे क्या कहें , क्या बात करें
दिल, की यह मर्जी है की हम चुप चाप रहें

Wednesday, 5 September 2012

मेरे दिल का सौदा लेकर

मेरे दिल का सौदा लेकर
निकल पडे हैं शब्द बेचारे
तुझसे मिल नहीं पाए
तो लौट आएगे हारे हारे ......

Sunday, 2 September 2012

दिल मेरा धडकता है, वो बादलों से निकलता है।।।।



हुई मुश्किल की अब इबादत किसकी करूँ
दिल से "तू" जुबान से "तू" ईमान से "तू" निकलता है
चाँद पागल है , आवारा है , बैचैन है
दिल मेरा धडकता है, वो बादलों से निकलता है।।।।

Friday, 31 August 2012

कितना मुश्किल है सच के सहारे जिंदगी काट लेना।

कितना मुश्किल है सच के सहारे जिंदगी काट लेना। मैं कभी अपने उस दोस्त को देखती हूँ तो समझ नहीं पाती, की किस गुनाह की सजा जी  रहा है वो , और कितने दुःख हैं, जिंदगी में जीने के लिए क्या सचमुच में भगवान् होते हैं, अगर हाँ तो फिर क्यूँ इतना दुःख है जीवन में। भगवान् जहा हो वहां तो सुख होना चाहिये न????।। मेरी नन्ही सी बच्ची, कैसे तड़प उठती है।।। कहाँ है भगवान् वहां???/
क्यों है इतना दुःख वहां?? किस विश्वास की कमी है।?? पिछले जन्म का कोई अपराध?? तो एक आदमी के साथ सब लोग क्यूँ काटते  हैं कारावास?? कैसे भगवान् अलग अलग लोगों का भाग्य एक साथ पिरोता है??? कितना फालतू टाइम है न भगवान् के पास।।।।।।

एक तूफान है जो सीने में पल रहा है

एक तूफान सा है जो सीने में पल रहा है
दिलासा दिया था उसने की ख़ामोशी से गुजर जाएगा









तेरी यादें

बंद कर लूँ मै आंखे ,कहीं उफन न जाए
तेरी यादें है जो मचल-मचल  के याद आती है

आँख से निकलता नहीं है अब

आँख से निकलता नहीं है अब
तेरा अक्स है , की तेरा ख़याल है ?????

Thursday, 30 August 2012

तुम्हारी यादें

मुझे भी मुक्ति चाहिये, थोड़ी नहीं पूरी  

काश तुम्हारी यादों को मैं 
जीवन की किताब के किसी
पन्ने की तरह फाड़ कर फेंक सकूँ
पर जब मन सो जाए तो धीरे से
पन्ने को सीधा कर तकिये के  नीचे रख सकूँ
सोचती हूँ तुम्हारी यादें  सपना बन कर
मेरी नींद में आने लगेंगी
तो फिर यह कैसी मुक्ति होगी
थोड़ी ? की पूरी ???????

काश तुम्हारी यादों को एक संदूक में
बंद करके समुन्द्र में बहा सकती
अगर कभी किसी को
मिलता यह यादों से भरा संदूक
और वो खोलता तो वो सब यादें
मुक्त हो आकाश में उड़ जातीं
और  फिर मेरे पास लौट आतीं
और मुझे कोसती, की मैने क्यूँ
उन्हे अपने से दूर जाने दिया
तो फिर यह कैसी मुक्ति होगी
थोड़ी ? की पूरी ???????????

Wednesday, 29 August 2012

उसको मालुम तो है ,पर यह नहीं मालुम

उसको मालुम तो है ,पर यह नहीं मालुम
की  वो कितना प्यार करता  है मुझसे ??????

Tuesday, 28 August 2012

हम साथ साथ मुस्करा सकें

ऐसा कुछ भी नहीं था मुझमे की
तुम मुझे भूल न सको
पर कहीं कल अचानक कोई जिक्र हो
किसी और  की
पर तुम्हारे जेहन  में मेरी आकृति उतरे
तो मुस्करा जरुर देना
क्योकि सिर्फ इतना ही तो चाहा
था मैंने तुमसे
की कभी हम साथ साथ मुस्करा सकें .....

Sunday, 26 August 2012

पत्थरों से टकडा उठी हैं तनहा लहरें

पत्थरों से टकडा उठी हैं तनहा लहरें
किनारों को हिलाने की कोशिश में।.......(वंदना)

Thursday, 23 August 2012

मेरे पते पर मेरा नाम है

मेरे पते पर मेरा  नाम है
मुझे मालूम  है वहां कोई रहता जरुर है
लफ़्ज़ों की कमी कभी  महसूस न हुई
सीने में एक बेचैन दिल धरकता जरूर है।.......... (वंदना )

Tuesday, 21 August 2012

बेवकूफ मन


हर बार मुसीबत में मन हार जाता है
 फिर घबरा के जीना, मन जी लेता है।


Monday, 20 August 2012

तुम रहो बस ज़रा चुप चुप

फलक तक बात पहुँचने दें
जमीं को और सुलगने दें
तुम रहो बस ज़रा चुप चुप
ख़ामोशी को बात करने दें 

आदमी हकीकत है क्या की छलावा है




आदमी हकीकत है की छलावा है
कब किसने, किसको कहाँ पुकारा है
शहर सुनसान है , लोग वीरान हैं
आदमी गुजरे वक़्त में जीता रहता है ....


 

जैसे एक लम्हे को एक याद ने कैद किया हो एक उम्र के लिये

सुनहरी रात में जब छत पर बैठे थे हम तुम
उस अंधेरे में किस से हमे छुपाया था तुमने
वो  मेरे माथे से लट हटाते ही,उँगलियों  से
अधूरे शब्द में क्या  लिखा था मेरे होठो  पर ?
क्या लिखा था उस रात, तो मैं पढ़ नहीं पाई
पर मेरे बदन को वो सिहरन अब तक याद है
जैसे एक लम्हे को एक याद ने कैद किया हो एक उम्र के लिये 

दिल ही तो है



दिल धडक उठता है उनसे मिलकर 
बाकि हर वक़्त दिल खामोश रहता है।...

vipins poetry on school life

याद आता है बहुत वो गुजरा हुआ ज़माना
वो अपनी स्कूल की लाइफ वो बचपन का याराना
वो सुबह-सुबह मम्मी का हमको जगाना
और हमारा मम्मी को कहानियां सुनाना
वो गुस्से में मम्मी का डांटना
और रात में डैडी से शिकायत करना
वो असेम्बली  प्रयेर, वो असेम्बली का तराना
वो घंटी बजते हे क्लास से निकलना
वो लंच में जाकर छोले  -भटूरे समोसे खाना
वो तपती धुप में अजमल खान ग्रौंद में खेलने जाना
लेफ्ट राईट लेफ्ट राईट कहते हाथों  का उठाना
पि  टी टीचर को धोखा दे कर घुमने जाना
वो बात बात पर टीचर से जीद करना
वो गलतिओं पर मासूमियत से  सॉरी करना
वो रात को होमवर्क के वक़्त बहाने करना
और क्लास में मिस सिंघल से पनिशमेंट मिलना
लेट स्कूल जाने पर जेंनिफेर मेम से झाड़ खाना
और फिर दयावान मिस वढेरा का हमको बचाना
वो शरारतें वो कहानिया
लोग जिनको कहते थे शैतानियाँ
मुड़ कर देखता हूँ तो सोचता हूँ की
क्या जमाना था वो जो गुजर गया
वो जमाना कितना सुहाना था
वाकई क्या जमाना था ,वाकई क्या जमाना था

Sunday, 19 August 2012

याद आता है वो तेरा कागज पर "प्यार " लिखना

याद आता है वो तेरा कागज पर "प्यार " लिखना
और मेरा , उसे देख कर भी अनदेखा  करना







Friday, 17 August 2012

हाँ कितने प्यार से बुलाती है जिंदगी

हाँ कितने प्यार से बुलाती है जिंदगी
पर  उतने ही प्यार से बुलाती है मौत भी ....

Wednesday, 15 August 2012

और फिर "आज" मर जाता है

अलसाई शाम ढलने से पहले
गुलाबी ओढ़नी लिए दबे पाँव
रात के सिरहाने बैठती है
चाँद भी कुछ संकुचाया सा
थोडा शरमाया सा ,बादलों
की ओट से निकलता है
पंछी  अपनी धुन में गीत गाते
डूबते सूरज की स्याही में
अपने घर को उड़ रहे हैं
मैं भी अब कुर्सी पर आधी जगी
आधी सोयी सी
बंद होती पलकों से
उस लम्हे को गुजरते हुए देखती हूँ
जिसका  नाम "आज" है 
"आज" जाने से पहले
मेरी आँखों मे अपना प्रतिबिम्ब देखता है
उसे मालुम है फिर कभी मेरी आंखे
उसे नहीं देख पाएंगी और वो भी
कभी मुझसे मिल नहीं पाएगा 
बिछड़ जाने की विचलित सी अनुभूति
में हम दोनों एक सी पीड़ा जी लेते हैं
और फिर "आज" मर जाता है
और मैं सो जाती हूँ .....





Tuesday, 14 August 2012

सुबह उठी हूँ तो चौंका दिया एक ऐसे एहसास ने

सुबह उठी हूँ तो चौंका दिया एक ऐसे एहसास ने
की आज सदिओं बाद तुम नहीं आए हो मेरे ख्वाब में ...

Happy Independence Day

वो हवा में जो थोड़ी  महक सी है
वो घटा में जो थोड़ी  धनक सी है
वो जो भीड़ है , उस भीड़ में
एक अजीब  अपनी पहचान सी है
वो सारे जहाँ में मिलता नहीं
माँ के गोद सी  महफूज तो है
यह मेरा देश है इस बात का
मुझे फक्र भी है , मुझे यकीन भी है.  

Monday, 13 August 2012

वो जो कुछ पल हमने मांग लिए थे वक़्त से

वो जो कुछ पल हमने मांग लिए थे वक़्त से
वक़्त ,उन लम्हों का हमसे हिसाब मांगता है....

कैसे कह दूँ वक़्त से की भुला देंगे वो पल
दिल , हर वक़्त उन पलों में जीना चाहता  है ....

न जान सकी मैं तुझको न पा सकी खुद को
ये दिल न जाने क्यूँ ,खोया -खोया सा रहता है 

Thursday, 9 August 2012

मेरी आँख में तेरा अक्स है

मेरी आँख में तेरा अक्स है
तू कहीं नहीं है मेरे सामने
आंसू भी मैं बहा न सकूँ
तू छलक न जाये मेरे सामने



Wednesday, 8 August 2012

मुईन अह्सन जज़्बी

मेरी आंखों में अभी तक है मोहब्बत का ग़ुरूर
मेरे होंटों को अभी तक है सदाक़त का ग़ुरूर

मेरे माथे पे अभी तक है शराफ़त का ग़ुरूर

ऐसे वहमों से ख़ुद को निकालूं तो चलूं


मुईन अह्सन जज़्बी

Tuesday, 7 August 2012

तू जब कभी ग़ज़ल बन जाता है तो मुझे अच्छा लगता है

तू जब कभी ग़ज़ल बन जाता है तो मुझे अच्छा लगता है
तू जब दिल में ,मेरे गुनगुनाता है तो मुझे अच्छा लगता है 

Sunday, 5 August 2012

चाँद और मैं टकटकी लगाए एक दुसरे को देखते हैं

चाँद और मैं टकटकी लगाए एक दुसरे को देखते हैं
कितनी बातें हम कह जाते है बिना कुछ बोले
शब्द चुप रहते हैं अक्सर निगाहें बोल जाती हैं
रात ,हम दोनो को प्यार से अपने आगोश में बुलाती है
चाँद और मैं ,सपने में मिलते हैं , कह कर सो जाते हैं


और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना

और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना
कितनी मजबूर है मोहबत  यह  तू देख जरा
आह भर्ती है मोहबत  पर कहती नहीं
कितने अफसाने देखे है तूने   ख़त्म होते
कितने परवाने देखे है शमा पर  फन्ना होते
कितनी आँख से आंसू बहे मोम बनके
एक तू है की साथ मेरे जलता है
एक तू है की साथ मेरे पिघलता है

Saturday, 4 August 2012

मैं अग्नि हूँ

मैं अग्नि हूँ
अग्नि हूँ , मेरी किस्मत यह है
जलती हूँ मैं खुद, सबको भस्म कर के
आग की लपटों  से चुन लेती हूँ मैं आहें
इसके पहले की वो आसमान से मिले
राख के ढेर से लोग ले जाते हैं "कुछ"
मैं बुझ जाती हूँ , तेरी , उम्र लिए

और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना

और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना
हर आस ,हर उम्मीद धुआं धुआं सा है
दिल-ए-अरमान भी बुझा बुझा सा है
एक तेरी लौ जो टिमटिमाती  है
कभी बुझती है कभी खुद से जल जाती है
एक सुरंग से आती रौशनी की तरह
 तू  ही है की साथ मेरे जलता है
और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना

Thursday, 2 August 2012

और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना

और कुछ  देर चिरागों युहीं जलते रहना 
मुमकिन है ,की दुनिया ने समझा ही नहीं
कितना  मुश्किल है दिन रात युहीं जलते रहना 
मैं तो खुश हूँ की तू साथ मेरे जलता है
वर्ना मशरूफ  जमाने का  वक़्त बर्बाद करते
युहीं रोज दर्द-ए -जिगर दिखाने क्या जाते  
और कुछ  देर चिरागों युहीं जलते रहना

और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना
सफ़र में मुमकिन है वो साथ चले  भी नहीं
मंजिल-ए -दिल शायद कभी मिले भी नहीं
कितने अधूरे अफसाने लिये महकती है फिजा
कितनी बिखरी हुई आरजू लिये उडती है हवा
एक तू है की साथ मेरे जलता है
और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना .....

और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना 
रास्ते में हैं अंधेरे नसीबों की तरह 
हर मुस्कान के पीछे रुसवाई है 
हर शख्श से दूर उसकी परछाई हैं 
एक तू है की साथ मेरे जलता है 
और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना  

और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना
नये मुसाफिर को राहें गुमराह करती हैं
हर एक ठोर को मंजिल समझता है
हर नयी उम्मीद पर दिन बदलता है
हर नये ख्वाब को दिल, सच समझता है
एक तू है की साथ मेरे जलता है
और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना...


और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना
हर आस ,हर उम्मीद धुआं धुआं सा है
दिल-ए-अरमान भी बुझा बुझा सा है
एक तेरी लौ जो टिमटिमाती  है
कभी बुझती है कभी खुद से जल जाती है
एक सुरंग से आती रौशनी की तरह
तू  ही है की साथ मेरे जलता है
और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना


और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना
कितनी मजबूर है मोहबत यह तू देख जरा
आह भर्ती है मोहबत  पर कहती नहीं
कितने अफसाने देखे है तूने ख़त्म होते
कितने परवाने देखे है शमा पर फन्ना होते
कितनी आँख से आंसू बहे मोम बनके
एक तू है की साथ मेरे जलता है
एक तू है की साथ मेरे पिघलता है






Wednesday, 1 August 2012

तन्हानियाँ है मजबूर , इनकी यह फितरत है

तन्हानियाँ है मजबूर , इनकी यह फितरत है
हमारे पास चली आतीं है मुंह छुपाने को ...



मुईन अह्सन जज़्बी

अपनी सोई हुई दुनिया को जगा लूं तो चलूं
अपने ग़मख़ाने में एक धूम मचा लूं तो चलूं

और एक जाम-ए-मए तल्ख़ चढ़ा लूं तो चलूं


अभी चलता हूं ज़रा ख़ुद को संभालूं तो चलूं


जाने कब पी थी अभी तक है मए-ग़म का ख़ुमार

धुंधला धुंधला सा नज़र आता है जहाने बेदार

आंधियां चल्ती हैं दुनिया हुई जाती है ग़ुबार


आंख तो मल लूं, ज़रा होश में आ लूं तो चलूं

 वो मेरा सहर वो एजाज़ कहां है लाना
 मेरी खोई हुई आवाज़ कहां है लाना
 मेरा टूटा हुआ साज़ कहां है लाना
  एक ज़रा गीत भी इस साज़ पे गा लूं तो चलूं

मैं थका हारा था इतने में जो आए बादल

किसी मतवाले ने चुपके से बढ़ा दी बोतल

उफ़ वह रंगीं पुर-असरार ख़यालों के महल


ऐसे दो चार महल और बना लूं तो चलूं



मेरी आंखों में अभी तक है मोहब्बत का ग़ुरूर

मेरे होंटों को अभी तक है सदाक़त का ग़ुरूर

मेरे माथे पे अभी तक है शराफ़त का ग़ुरूर

ऐसे वहमों से ख़ुद को निकालूं तो चलूं


मुईन अह्सन जज़्बी

और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना

और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना 
रास्ते में हैं अंधेरे  नसीबों की तरह 
हर एक मुस्कान के पीछे   रुसवाई  है  
हर शख्स से दूर उसकी परछाई हैं 
एक तू है की साथ मेरे जलता है 
 और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना 
 

खुदा ने तो रोका था , खता से पहले

खुदा ने तो रोका था , खता से पहले
यह नामुराद दिल ,क्या सुनता है किसी की?????

Tuesday, 31 July 2012

और कुछ देर चिरागों युहीं जलते रहना

और कुछ  देर चिरागों युहीं जलते रहना 
मुमकिन है ,की दुनिया ने समझा ही नहीं
कितना  मुश्किल है दिन रात युहीं जलते रहना 
मैं तो खुश हूँ की तू साथ मेरे जलता है
वर्ना मशरूफ  जमाने का  वक़्त बर्बाद करते
युहीं रोज दर्द-ए -जिगर दिखाने क्या जाते  
और कुछ  देर चिरागों युहीं जलते रहना

Saturday, 28 July 2012

मेरी आँख में झलकती तस्वीर तेरी

मेरी आँख में झलकती तस्वीर तेरी
मेरी झिलमिलाती बेबसी का इज़हार करती है।.......

Friday, 27 July 2012

जिंदगी एक "क्यूँ" का जवाब क्या देती

जिंदगी एक "क्यूँ" का जवाब क्या देती
जब हर मोड़ पर सवालों की भीड़ मिलती है ....

हमको मालुम है की तुमको भी कुछ ऐसा दुःख है
जो कहने से बढ़ता है, छुपाने से दुखता है

दिल की बातें न करो , दिल तो वो शीशा है
जो टूट भी जाए तो भी धरकता ही है .....

Wednesday, 25 July 2012

कुछ शेर ...

उम्मीद भरी उड़ान जब भरता है कोई
जिंदगी अफ़सोस लिये कोने में छुप जाती है

दिखाई तो दिया था एक शख्स शीशे के उस पार
टकरा कर रह गयी चिड़िया की तरह कुछ  उमीदें

नहीं मैं नहीं जानती सुख- दुःख का कोई अंत
युहीं छुप छुप के चले जिंदगी तो अच्छा  है

चाहती थी की  मिल सकती , मैं गुजरे हुए सायों से
वक़्त की यह शर्त है ,की उन्हे अतीत में  रहने दूँ .....




Thursday, 19 July 2012

यह मेरे दिल की खता नहीं


तुमने जब कल मुझसे कहा "सुनो"
उसके पहले मैने कुछ सुना नहीं
मैने जब कल तुम्हे  देखा
उसके पहले मैने कुछ देखा नहीं
यह प्यार है या भ्रम है
यह जो भी है , मुझे गिला नहीं
यह तुमसे मिलने का सरुर है ?
या है यह मेरी दीवानगी ?
यह जो भी है , मुझे यकीन है
यह मेरे दिल की खता नहीं






होंसले मेरे क़ैद हैं कई जन्मो से


होंसले मेरे क़ैद  हैं कई जन्मो से
ये भी झिझकते हैं पहल करने को 
चलने को संग मेरे तैयार हैं 
मेरी तन्हाई और मेरी रुसवाई 

जिस चार दिवारी में, मैं हर दिन आबाद हुई

जिस चार दिवारी में, मैं हर दिन आबाद हुई
इस चार दिवारी में, मन अब लगता नहीं है
खोल के पंख अब उड़ सकूँ आकाश में
चिड़ियों  के पंख घर  बैठ कर तो  गिनते नहीं है








आज फिर कहा है प्यार तुमने

आज फिर कहा है प्यार तुमने
आज फिर सुना है प्यार हमने
दुनिया वालों को छोड़ो, जलतें हैं वो
आज फिर जिया है प्यार हमने।



Wednesday, 18 July 2012

दिल

न उनको भूल जाना है 
न उनको याद रखना है
यह दिल की आजमाइश है
जो जिंदगी भर आजमाना है 

Tuesday, 17 July 2012

मासूम ख्वाइश

हाँ अब दूर निकल आई हूँ तुमसे
तुम्हारे अंदर जैसे कैद थी मैं
अपनी मासूम ख्वाइशों
चौराहे के चादर पर पसार दिया है मैने
की शायद थोड़ी धुप लगे या थोड़ी हवा लगे
मनहूस सी कोई गंध निकल जाए
मेरे अरमानो से
और मैं बचा सकूँ अपनी बची हुई हस्ती
जो पल पल घुट घुट कर मरती जा रही थी


मैं और तुम

हम आपके नज्मो से कुछ शेर चुरा लें तो
हम आपको अपनी आँखों में छुपा लें तो 
मालूम है की मिलती है मोहब्बत किस्मत से 
हम आपको अपनी किस्मत बना लें तो    


Friday, 13 July 2012

मत करो बात हमसे

अच्छा जाओ,चलो मत करो बात हमसे
धडकनों को तो तुमसे इज़ाज़त नहीं लेनी।.... 

Wednesday, 11 July 2012

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तुझे जबसे मैने खो दिया।...

मेरे प्यार ने मेरी आस को
एक नया काम सिखा दिया
मेरी आस गिनती है साँस को
तुझे जबसे मैने खो दिया।........

नाराज हो तुम भी अपने आप से

 नहीं तुमसे कोई फरियाद नहीं है मुझे
तुमने तो  चाहा है मुझे जी जान से
फिर  कभी क्यूँ लगता है ऐसा मुझे
की नाराज हो तुम भी अपने आप से    

Tuesday, 10 July 2012

दिल और दर्द

दिल में एक दर्द सा  उठा है लेकिन
तुम कहो तुम्हारा हाल क्या है
है और बात की किसी से कहता नहीं कुछ
ऐसा नहीं है की परेशान नहीं है     

Monday, 9 July 2012

अगर तुम होते मेरे पास।


कह तो रही हूँ मैं कबसे तुमको
थक गया है वक़्त, थम गयी है आस
एक अनकही सी उदास बात दिल की
कह पाती , अगर तुम होते मेरे पास।  

Sunday, 8 July 2012

खुद की तलाश में

यह मेरी नजर का भ्रम है
या की आँख थोड़ी सी नम है 
मैं धुल  धो कर  हटा भी दूँ 
पर आएऩे पर कैसी  यह गर्द है
हैरानी है मुझे इस बात से
मैं खुद से कभी मिल न सकूँ
वो कौन है जो उस पार है ?
जो देख के मुझे हंसती नहीं 
मेरे साथ साथ रोती नहीं 
गर वो मैं हूँ , खुद की  तलाश में 
तो कैसे उसे पहचान सकूँ 
अगर वो रूह है किसी और की
तो मंजिल तक कैसे पहुंचा सकूँ




Saturday, 7 July 2012

तू भी तो मुझे भुला जरा

मेरे साथ में, तेरी याद में, वक़्त युहीं खड़ा रहा
मैं चली तो हूँ तुझे भूलने ,तू भी तो मुझे भुला जरा ......  

Thursday, 5 July 2012

नींद

चलो अब नींद को चुपके से बुलाया जाये
कहीं मालूम न हो आँखों को , की मैं सोने चली।.........

Wednesday, 4 July 2012

मैं वक़्त और तुम

अपने आँचल में छुपाती हूँ वक़्त को
जब भी खोलूंगी, वक़्त बिखर जाएगा
तेरी गलियों में ,भीड़ है, हलचल है ,आपाधापी है
वक़्त गुमशुदा है ,कहाँ जायेगा
तुमने कहा तो ,छोड़ दिया तुम तक जाना
वक़्त तो बच्चा है रूठ जायेगा
तुम ,सुनो,मुझको मना लो, प्यार करो
पछताओगे, गर ,वक़्त निकल जाएगा  


तनहा मुस्कराते हैं।......

तुम्हारी एक बात पर जानम लोग महफ़िल जमाते हैं 
एक हम हैं, की तनहा रोते हैं, तनहा मुस्कराते हैं।.........   


Monday, 2 July 2012

नींद

नींद मुझे हर रात सुबह तक जगाती है
चिड़ियों के उठ जाने पर मेरी आँखों में आती है ....

Sunday, 1 July 2012

"जाज"

"जाज" की धुन पर नाचते
मैं और तुम पूरी रात नहीं थकते
तुम्हारा चेहरा मेरे सर पर टिका है
हमने शायद नजर भर देखा नहीं है
एक दूसरे को।
कहो मेरी आँख का रंग भूरा है या गुलाबी ?
पर मेरी कमर को तुम्हारी उगलियों की
गर्मी कैसे याद है ?
गहरी साँसों की गर्मी में थिरकते होठ
व्याकुल मन को पिघलते देखते हैं
झुकी नजर से मैं अपराध को स्वकृति देती
देवी जैसी महसूस करती हूँ
तो कहो अपराध का रंग नीला है की हरा है ?
इस मदहोश नाच में , मैं और तुम
कैसे गुलाबी हो उठे हैं
आँख बंद किये मैं कुछ नहीं सोचती
कुछ भी तो नहीं कहती
सिर्फ वो "जाज" की आवाज़ सुन
मेरे थिरकते कदम
लोगों से, भीड़ से , समाज से
मीलों दूर निकल आये है
अब बस मैं हूँ और तुम हो
और हमारी साँसों में
बजती वो "जाज "की वो धुन  है 

Desire by Ryan Adams.

By Dr. Kumar Vishwas.


बस एक ये है की जीना ज़रा सा मुश्किल है,
किसी के साथ होने से छोड़ जाने से,
कोई  ये बात समझ ले की कुछ नहीं होता,
किसी के याद रखने से भूल जाने से ..."

कैसी मुश्किल कर दी by Dr. Kumar vishwas

जग भर के हर आकर्षण को, मैंने आकर्षित किया मगर,
वो कौन अकेला पल था जब मैंने तुम ...को देखा पल भर,
तुम ने भी अपनी सहज दृष्टी के उजले-उजले कलशो से,
रूप-रँग-रस तरल माधुरी इन नयनों में भर दी ,
कैसी मुश्किल कर दी......