Monday, 27 February 2012

जिंदगी

न जिन्दा रही न मर सकी तब भी
जिंदगी रोज नये इम्तिहान लेती रही
 मैं खड़ी रही  चौराहे पर आस में तेरी
जिंदगी, रोज युहीं आँख से फिसलती रही  

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