Thursday, 16 February 2012

मैं सिर्फ और सिर्फ तुमको सुनती हूँ..........

अगर मैं कहूँ तुमसे
या कभी न कहूँ तुमसे
या फिर भूल जाऊं तुम्हे
या भुला न पाऊ तुम्हे
तुम रोज याद दिलाते रहना
की तुम मेरे कौन हो

फूलों की खुशबू ,से
कांटो की चुभन से
ओस की बूंदों से
तितलियों से पूछ कर
तुम रोज बताते रहना
की तुम मेरे कौन हो

चंदा के दाग से
सूरज की आग से
धरती की सौंधी महक से
प्रीत और बेवफाई से पूछ कर
तुम रोज चिलाते रहना
की तुम मेरे कौन हो

मेरे दिल तुमको तो मालूम है
की मैं सिर्फ और सिर्फ तुमको सुनती हूँ..........













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