Monday, 23 April 2012

मैं और तारा


हर बार काली अँधेरी रात में
जब तारों की बारात देख
मन में हर बार यह गीत उभर आता है 
"लाखों तारे आसमान में"
अनायास मन उदास हो
हर बार  यही सोचता  है
 हाँ सच "एक मगर ढूंढे न मिला "
कल रात छत पर लेट कर
जब तारों से की मैने बात
कितना दर्द है तुमको की
इतना चमकते हो तुम
मेरे जैसा ही कोई पुराना
दर्द है क्या तुमको 
इतना पूछना था 
की एक तारा मुस्करा उठा
खिलखिला कर हंसा
आसमान से टूट कर 
मेरे तकिये पर आ टिका
मुझे बाहों में भर,प्यार से बोला
मेरी जान, चलो तुमने हाल तो पूछा
मैं रोज तुम्हारे  लिये ही तो  जलता हूं  
तुमको देखने रोज रात मैं आता हूँ
तुम खुश हो, देख कर, मैं जगमगाता हूँ
उहीं जल जल के हम तुम भी जी लेंगे 
हैं जिंदगी जहर , फिर भी हम पी लेंगे
कल को जब बनोगी तुम भी तारा
मेरी बाँहों में  ही आकर रहना
बाँट लेंगे हम तुम दुःख सारा
बाँट लेंगे हम तुम दुःख सारा ...




  







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