Wednesday, 4 April 2012

चाँद तुम आसमान पर टंगे टंगे

चाँद तुम आसमान पर टंगे टंगे
थक कर कहीं सो तो नहीं जाते हो?
जैसे सोई नहीं कई सदिओं से मैं
वैसे मेरे साथ एक रात तो जगो

आज  रात को जगो,  रात भर के लिए
चाँद ,महसूस करो  की मैं जगती क्यूँ हूँ?

इस पार जो तुम मुझे देख मुस्करा उठते हो
याद करता है.कोई मुझे  उस पार, तो कहो
उस पार की कहानी  आज सुनाओ न
जमी प़र आ मुझे कोई गीत सुनाओ न
हम राह बन सके हर रात हम तुम
युहीं मेरे ख्यालों में रहें आबाद हम तुम







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