Monday, 16 April 2012

तुम भी चले आते तो कोई बात हो

जाने किस मोड़ पर फिर मिल जाएँ हम तुम
जाने किस मोड़ पर फिर वो  सुबह हो

बैठे हैं इस आस पर की तुम याद तो करो
गुजर जाएगी यह रात भी कल सुबह को

याद आता है हर रोज वो दिन वो पल छिन
तुम भी चले आते तो कोई बात हो



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