Monday, 14 May 2012

ऐसा क्यूँ लगता है की तुम आवाज़ दे रहे हो मुझे ?

भोर में उठते ही चिड़ियों का चहकना सुनकर 
ऐसा क्यूँ लगता है की तुम आवाज़ दे रहे हो मुझे ?

जब भी कभी मीठी सी धुप गुनगुनाती है 
ऐसा क्यूँ लगता है की तुम आवाज़ दे रहे हो मुझे ?

जब भी पढ़ती हूँ गीत ,गजल , अफसाने लोगों के 
ऐसा क्यूँ लगता है की तुम आवाज़ दे रहे हो मुझे ?

डाल से टूट कर गिरता है जब पीला पत्ता 
ऐसा क्यूँ लगता है की तुम आवाज़ दे रहे हो मुझे ?

चाँद का गुरुर देख कर ,जब तारों से मैं करती हूँ बात 
ऐसा क्यूँ लगता है की तुम आवाज़ दे रहे हो मुझे ?  






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