Tuesday, 22 May 2012

तुम

तुम चली जायोगी 
याद तो आयोगी न ?
अपनी यादों को कहना 
जब भी कभी वो अकेली हो 
तो फोन पर बात करे  
यादों की एक अजीब सी आदत है 
खुद ही खुद से बात करती है 
तुम यादो की बातों को रोक
मुझसे बात करना
कैसे कहूँ की परेशानी नहीं होगी
परेशानियों को चुनकर-गिनकर
उन पर जोर से हसना
दोनों अंजुरी से अपने
घोसले को दिन रात संभालना
कभी जब भारी समस्या हो 
तो अंजुरी खोल, दोनों बाजुओं
से झकझोड़ देना
और  सुनो जब गर्मी की
पहली बरसात हो
तो नंगे पैर पानी में छप छप
नहाना और खूब हंसना
इतना की तुम्हारी हंसी
यहाँ तक सुनाई दे
और मैं कह सकूँ सब से
की उसकी यादें रोज हंसती हैं


तुम चली जायोगी 
याद तो आयोगी न ?





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