Monday, 18 June 2012

मैं तुमको कल बता दूंगी






मैं तुमको कल बता दूंगी 
वो आने वाले कल की हलचल 
जो आज मेरे सीने में है 
पिघलता पल हर दिन का 
टंगा सा मेरी खिड़की पर है 

मैं तुमको कल बता दूंगी 
कितनी उम्र बच गयी 
या बीत गयी इंतज़ार में 
कितने आंसू बह चुके 
या सुख गए याद में 

मैं तुमको कल बता दूंगी 
रोज दिल की आह को कैसे 
चुपचाप युही सुनती रही 
वक़्त बहरा बुजुर्ग बन 
दीवार पर टंगा रहा 

मैं तुमको कल सब बता दूंगी 











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