Friday, 31 August 2012

कितना मुश्किल है सच के सहारे जिंदगी काट लेना।

कितना मुश्किल है सच के सहारे जिंदगी काट लेना। मैं कभी अपने उस दोस्त को देखती हूँ तो समझ नहीं पाती, की किस गुनाह की सजा जी  रहा है वो , और कितने दुःख हैं, जिंदगी में जीने के लिए क्या सचमुच में भगवान् होते हैं, अगर हाँ तो फिर क्यूँ इतना दुःख है जीवन में। भगवान् जहा हो वहां तो सुख होना चाहिये न????।। मेरी नन्ही सी बच्ची, कैसे तड़प उठती है।।। कहाँ है भगवान् वहां???/
क्यों है इतना दुःख वहां?? किस विश्वास की कमी है।?? पिछले जन्म का कोई अपराध?? तो एक आदमी के साथ सब लोग क्यूँ काटते  हैं कारावास?? कैसे भगवान् अलग अलग लोगों का भाग्य एक साथ पिरोता है??? कितना फालतू टाइम है न भगवान् के पास।।।।।।

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