Monday, 17 September 2012

और क्या है वंदना के बक्से में

 
स्कूल के भीड़ में घूमती रूह बंद है
तेजी से आँख के सामने से निकल जाती है ,
 
हर  एक दोस्त की हंसी कैद है ,
जो अब भी मन को खुश करती है
 
लम्बी सड़क पर हम-तुम जो निकल पडे थे
जाना तो याद है पर हम वापस  कैसे आये थे?
 
भोलापन जो था हमारे दिलों में था
वो अब भी  कभी कभी कहीं कहीं से झांकता है
 
पहले प्यार का पहला इंतज़ार अभी भी
दिल धरकाता है
 
दिल के टूटने की आवाज़ का शोर पड़ा  है
आंसुओ का गीलापन , सुख कर कोने में पड़ा है
 
स्कूल से "फुट" कर  कहीं भी  जाने
पर जो अपराध की भावना थी
वो भी बंद है
 
और यह सब तो सिर्फ उन दो साल की कहानी है... जब हम और तुम एक दुसरे को जानते थे........ याद का क्या??? इसे आदत है.. सब कुछ याद रखना..

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