Thursday, 27 September 2012

जो तुम उदास रहते हो

जो तुम उदास रहते हो
और मुझसे भी नहीं कहते
मेरे दिल की बैचेनी क्यूँ
कुछ ज्यादा शोर मचाती है?

जो तुम चुपचाप यूँ रो लो
और मुझे मालूम भी न हो
तुम्हारे  शहर का बादल क्यूँ
मेरे शहर में बरसता है ?

जो तुम्हारे सपने न पूरे हों
युहीं कभी जो अधूरे हों
मेरी खुली आँखों में क्यूँ
ख्वाब यूँ लहराता है .........












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