Sunday, 9 September 2012

चाँद कुछ तो कहता होगा न

जो चाँद दीखता है मुझे, वो तुझे भी दीखता होगा न
तड़प कर मेरी आहों से चाँद भी तो रोया होगा न
आई है रात जालिम सी , मैं चुप हूँ, मगर तू सुन ले
मेरा दिल पढ़ कर रातों को ,चाँद कुछ तो कहता होगा न (वंदना)



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