Sunday, 9 September 2012

ME WHEN I AM JUST ABOUT TO GET DRUNK

आज यकीन हो गया की मिर्ज़ा ग़ालिब ने कितनी सारी  नज्म, गजल, पीने के बाद ही  लिखी होगी।। साली, हर पंक्ति पीने के बाद शाएरी जैसी लगती है।।।।

जैसे।।।।। अर्ज किया है।।।

होशो हवास गुल हैं
पर तुम खूब याद हो।।।।।।


या फिर।।।।।

लायी हैं रंग फिर से तेरी याद यूँ भी
दिखाई दिया तेरा चेहरा शराब में भी


या फिर।।

तुम मुझे भूल जाओ
मुझसे मिलो भी नहीं
हम भी मायूस से हैं
पर मजबूर नहीं।।।।।।

साला दीमाग है की।।। शाएरी उगलता है।।। I can talk shayeri... i can waLK SHAYERI.... I CAN LIVE SHAYERI.


HOPE YOU ARE OK BANNA TO REMEMBER ALL THIS...

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