Monday, 1 October 2012

अब तुम्हे रोज भुला कर देखते है न



हर तरफ शोर है, भीड़ है ,आपाधापी है 
कुछ रोज युहीं अकेले कहीं  रहते है न 
 

धुप जब भीगती है बारिश में यूँ 
सुनहरा रंग तो काला पड़ता  है न 

नींद मुश्किल से आती है कभी कभी 
कभी नींद से न जाग कर  देखते हैं न 

काफिले जातें है धुल की गुबार लिए 
धुल में तेरी तस्वीर बनाते है न।

मोहब्बत तो कर  ली हमने तुमसे 
अब तुम्हे रोज भुला कर  देखते है न 

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