Friday, 5 October 2012

"तुम्हारी याद" ...

सुबह आज देर से उठी है
लबों पर  एक अनदेखी मुस्कान लिए
दुपट्टा संभालती , यूही गुनगुनाती
अधरख की चाय में घुल कर
सुनहरी  धुप में बाल सुखाती
"तुम्हारी याद " आज खुश दिखती है 

रात के पिछले  पहर , में सिहर कर 
उठती ,फिर सो नहीं पाती
चाँद को बादल में छुपते -निकलते
देखती, मुस्करती ,  फिर आहें भरती
सुबह के इंतज़ार में जगती -सोती
"तुम्हारी  याद" आज दुखी दिखती है
और मैं , रोज  अपने दिल से कहती हूँ
की आज देखें किस "मूड "में उठेगी "तुम्हारी  याद" ...

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