Wednesday, 28 November 2012

अंतर्द्विन्ध्

अंतर्द्विन्ध्

अब कुछ नहीं कहूँगी
कुछ भी नहीं
मैं बिलकुल चुप रहूंगी
बिलकुल
सांस भी नहीं लुंगी
बिलकुल नहीं
तुम देखना , मैं जी लुंगी
एकदम
सांसो में तुमने जाल बिछाया है
गहरा
आँखों से आंसू मेरे बहेंगे
हाँ बहने दो
दिल को बंद करना है
निसंकोच करो
भूल जाउंगी तुम्हे
जल्दी करो
अब तुम भी कुछ मत कहो
अच्छा
अब तुम भी चुप रहो
बिलुकल
मेरी दिल की हलचल में
तुमको चुप होना होगा
मैं जब दिल से बात करूँ
तुमको जाना  होगा .....




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