Saturday, 21 January 2012

दो राह बन जाती है



हर राह चलते चलते अचानक 
दो राह बन जाती है
और मैं और तुम 
पूरी उम्र गुजार लेते हैं
यह सोच कर
की उस राह पर जाते तो  क्या होता???

बात पर भरोसा कर लें....

चलो यह तो पक्का रहा, की कल सुबह होगी
चलो इसी  बात पर  भरोसा कर लें....

(मीना कुमारी)

कई उलझे हुए खयालात का मजमा है मेरा वजूद
कभी वफ़ा से शिकायत , कभी वफ़ा मौजूद ..... 





Friday, 20 January 2012

मैं और मेरी बैचैनी ... अक्सर यह बातें करतें हैं

रोज, को कई ढंग से समझा लिया मैने
लोग बहुत व्यस्त हैं तो ठीक ही है
हम बेकाम, लाचार ही भले
बस अब खुद के बाहर निकल आना है 


एक जंजीर सी पड़ी है रूह पर
चारदीवारी भी मेरे हाल पर  सिसक उठी है 
रूह के अंदर जो एक ख्वाब है ,मरा हुआ
उसे अब पंख पसार कर उड़ जाना है 

जिंदगी तुझ को कैसे मैं नाराज करूँ?
कैसे  रूह को अब फिर से आजाद करूँ?
चार दिवारी से अब रिश्ता तोड़
अपनी हिम्मत को फिर एक बार सहारा दे दूँ.










Thursday, 19 January 2012

बेरुखी


यह बेरुखी तुम्हारी अब रास आ गयी है
हर रोज गले लगाती है प्यार से ...
यह बेरुखी तुम्हारी कुछ बोलती नहीं है
घबरा गयी शायद मेरे प्यार से ....


याद

अगर ऐसा मुमकिन होता तो क्या होता ?
दिल निकल कर सिने से फ़ेंक दिया होता
न मेरा रहा , न तेरा रहा यह काफिर दिल
हर वक्त किसी की याद में रोता है रहता ......

Wednesday, 18 January 2012

तेरी याद सताती है..

यह दिल की मजबूरी है,इसमे दोष नहीं तेरा
इसे तू नहीं, तेरी याद सताती है........

Tuesday, 17 January 2012

मेरी ही अमानत हैं.

मेरे मुकद्दर में तू नहीं है, न सही
यादे तेरी, तो मेरी ही अमानत हैं.....

mirza ghalib

जिस ज़ख्म की हो सकती हो तदबीर रफू की
लिख दीजियो या रब उसे किस्मत में अददु की 


अददु  ------- dushman







बर्बाद कर दिया हमे  परदेस ने मगर
माँ सबसे कहती रहती है बेटी मजे में है.........

Sunday, 15 January 2012

सूरज

सूरज तुमसे पहले अँधेरा पहुँच चुका था...
 और तुम छुपते- छुपाते
चांदी बिखेरेते
नदिया किनारे
पेड़ों की ओट से तुम
सुहानी शाम में
सोना बरसाते
पहाड़ों के उस पार
सूरज तुम्हे इंतज़ार किसका था