Saturday, 4 February 2012

Faiz poetry



कर रहा था गम-ए-जहाँ का हिसाब
आज तुम याद बेहिस्साब आये 

"वक़्त"


जब मेरा ही नहीं रहा यह दिल 
तो इस पर एतबार क्यूँ है ?

कभी छाँव , है कभी धूप है तो
जिंदगी तू इतनी परेशान क्यूँ है?

वो जो नहीं है तेरा ओ दिल
तुझे उसी पर इतना प्यार क्यूँ है?

"वक़्त" उतर जाता है ,अगले घंटे पर
तब वक़्त को भी इतनी थकान क्यूँ है?






Friday, 3 February 2012

faraz

   कौन किस के साथ कितना मुखलिस है "फ़राज़"
   वक़्त हर श्स्ख की औकात बता देता है .....

Thursday, 2 February 2012

beautiful lines by Dr. kumar vishvas.


    • तुम्हारे पास हूँ लेकिन जो दूरी है समझता हूँ
      तुम्हारे बिन मेरी हस्ती अधूरी है समझता हूँ
      तुम्हे मै भूल जाऊँगा ये मुमकिन है नही लेकिन
      तुम्ही को भूलना सबसे ज़रूरी है समझता हूँ

दिल

दिल में कुछ नमकीन सा लगता है
आसूंओं की भी क्या जुबान हुआ करती है ????

Wednesday, 1 February 2012

मैं और तुम

जान हो मेरी , यह जान कर भी 
कितने अनजान बने फिरते हो....
कभी , तुम्हे  जो रोक लिया , पूछ दिया
कहो मेरी जां,किधर तुम रहते हो ?




तन्हाई

तन्हाई को मत तलाशना तुम
दुनिया की भीड़ में अकेले तुम
तन्हाई, चली आई है मेरे साथ
जिस रोज जुदा हुए हम-तुम ....








Monday, 30 January 2012

काश हम सब मिल पाते तो अच्छा था

दिल मेरा,
अपनी ही धड़कन से डर गया
चौंक उठा,मुहं के बल गिरा 
हाँथ -पॉंव झाड़ कर खड़ा हुआ 
तो सोचा ,धक-धक 
की यह  आवाज़
जाने कहाँ से आ  रही थी
यह धक-धक फिर कह रही थी
की चल फिर ,एक बार मेरे साथ
मैं , ओ  दिल , तेरी धरकन हूँ
मुझसे अलग , तू अकेला है
और मैं चुप चाप खड़ी सोचती रही
एक मैं हूँ, मेरा दिल है और उसकी धड़कन है
हम सब  कभी मिल जाते तो अच्छा था
काश हम सब मिल पाते तो अच्छा था.....







याद

फिर एक याद निकल कर आई है
तुमसे मिलने का बहाना लाई है
आ कर बेठो मेरी पलकों में
नीद में डूब कर तमाशा देखो
भीगे दिन में चाँद की बातें
रात देर बाद  सूरज को आते देखो
सपनो का गावँ  है यह
मिलती है हर दुआ सबको
फिर एक बार तुझ से मिल सकूँ
एसी छोटी सी है दुआ मेरी
फिर एक याद निकल कर आई है
तुमसे मिलने का बहाना लाई है