Friday, 30 March 2012

मैं और तुम


मैं हूँ ,और मेरे साथ मेरी तन्हाई तो है
तू अकेला कहाँ -कहाँ जाएगा ?

Thursday, 29 March 2012

आंसू

रिम झिम से झिलमिलाते आंसू
होठों को मुस्कराते देख ठहर जाते हैं....


Wednesday, 28 March 2012

visit to school after 31 years.

कैसा लगा तुमने पूछा है
जन्नत में जा कर
सर झुकाकर
सीढ़ी उतर कर
सफ़ेद बादलों पर
धीरे से कदम रखते
जैसे नयी प्यास को पूरा होते
पर पुराने डर को याद करते
की इन्ही दरवाजों में
घुसकर निकलकर
कई बार आते जाते मैं
इतनी दूर निकल आई
की डर लगा
लेकिन एक अजीब सी
पुलकित सी टीस कह उठी
की यह डर मेरा था
यह दरवाजा, यह जमीन
यह सब कुछ मेरा था
सच कहूँ तो ऐसा लगा
की मैं भी वहीँ थी
कहीं गयी नहीं
कभी गयी नहीं
और मैं फिर से जिन्दा हो उठी
जैसे बच्चा अपनी माँ
को देख एक अजीब सी किलकारी
लगता है
जो सिर्फ उस माँ को सुनाइ
देती हो
जैसे दिल की बजती तरंग सिर्फ
दो प्रेमियों को सुनाई  देती हो
जैसे मंदिर की घंटी
सिर्फ उपासक को सुनाई देती हो
जैसे मेरा आज फिर उस
गुजरे कल में समां उठा हो
जैसे मैं फिर एक नन्ही बच्ची बन गयी
जैसे नयी दुल्हन पहली पहेल ससुराल गयी
बस ऐसा लगा
सिर्फ ऐसा लगा