Friday, 4 May 2012

दर्द


कितना दर्द है , क्या है, क्यूँ है
 दर्द की तराजू में तोलूँ कैसे
दिल है तो दर्द है लोगों ने कहा
मेरे दर्द को दिल उठाता क्यों है 

मैं और तुम


युहीं चलते चले मंजिल की खोज में 
तेरे साथ मंजिल भी दूर होती गयी......

Monday, 30 April 2012

मेरा दिल

यह दिल ही तो है जो सिर्फ अपना हैदर्द हो मुझको, इसको, जमाने को
ख़ुशी हो इसकी, उसकी, जमाने की
हर बार , हर रोज, हर पल
मुझमे रह कर मुझको समझाता है
कई बार, देखा है इसे
मैने कोने में सिसकते हुए
मेरे रुकते ही हंस कर खड़ा हो जाता है
कुछ नहीं , कुछ भी तो नहीं
तुम तो युही परेशान रहती होकह कर मुझे बहलाता है
तो कहो , की मैं क्या कहूँ इस पागल से दिल को?  

मै और मेरा दिल


चलो अब मान ली हार तुझसे ए दिल
अब न तडपा मुझे, जितना खुद तड़पता है ....

Sunday, 29 April 2012

मैं और मेरी तन्हाई

 हर पल  की  धडकन 
मेरी तनहाइयों को
एक नया संगीत सुनती हैं
मैं अक्सर सोच के  रह जाती हूँ
की यह जो पल है
और जो मेरी तन्हाई है
वो युहीं मेरे आस-पास क्यूँ रहती हैं







हाल -ए-दिल

मैं नहीं जानती हाल -ए-दिल या दिल-ए -हालात की मजबूरी
दिल-ए-बर्बाद कितना है,इसका हिसाब लेना है ??