Saturday, 12 May 2012

parvin shakir

चेहरा मेरा था निगाहे उसकी
खामोशी में भी वो बातें उसकी 

मेरे चेहरे पे ग़ज़ल लिखती गयी 
शे'र कहती हुई आंखे उसकी 

ऐसे मौसम भी गुजारे  हमने 
सुबहें अपनी थीं और शामें उसकी 

फैसला मौजे-ए-हवा ने लिखा 
आंधियां मेरी बहारें उसकी 

दूर रह कर भी सदा रहती हैं 
मुझको थामे हुए बाहें उसकी 

नींद इस सोंच से टूटी अक्सर 
किस तरह कटती हैं रातें उसकी 

हाँ बस ऐसा ही है



 हाँ बस ऐसा ही है 
हम दोनों है अकेले 
फिर भी साथ साथ चलते 
युहीं जब अचानक दूर 
की आकृति ,तुमसी, दिख जाए 
मन जाकर छु आये 

बस अब ऐसा ही है 
आएना पर धुआ सा 
जब साफ़ करने जाओ 
तुम्हारा  मुस्कराता चेहरा 
हांथो पर लिपट जाए 

हाँ बस ऐसा ही है 
भगदड़ भरी जिंदगी में
तुम्हारी  हंसती हुई खिलखिलाहट 
अकेला सा एक लम्हा बन 
दिल को छु जाये 

बस अब ऐसा ही है 
सांसो में तुम्हारी  खुशबू 
आँखों में बंद सपने 
होठो पर प्यार रख कर 
साए सा छु कर निकले 

हाँ बस ऐसा ही है 
हम दोनों है अकेले 
पर साथ साथ चलते .....


Thursday, 10 May 2012

मैं और तुम


कब आसूं मेरी पलक पर 
चलते रहे , रुके रहे
यह  जिंदगी उधार की
सपने तेरे बुनती रही 
कब पास तुम आये मेरे 
कब दूर तुम चले गए 
कब नींद मेरी, तेरी आस में 
रोज रात भर जगी रही 




Tuesday, 8 May 2012

प्यार्


प्यार् मुझसे तुम  ऐसा करो
की तुमको भी पता न चले
मुझको  भी खबर न हो
युही तुम मुझको सोंच, मुस्कराते रहो
युहीं मैं तुमको पलकों में छुपाती रहूँ 
वो जो मीठी सी एहसास है तुम्हारे सीने में
तुम उसका नाम मोहब्बत रखना
भीड़ में खड़ी तन्हाई जब
होठ मेरे छु कर निकले
मैं उसका नाम प्यार रख लूंगी
प्यार तुम मुझसे कुछ ऐसा करो
की जमाने को खबर न हो




Monday, 7 May 2012

मैं और तुम

एक सुकुन सा  है इस इंतज़ार में
दिल को मालूम है की तुम भी उदास हो.........

मैं युहीं खुद को तलाशने कहाँ कहाँ न गया

मैं युहीं खुद को तलाशने कहाँ कहाँ न गया
 बस तेरे दिल का दरवाज़ा खुला न था ......