Saturday, 19 May 2012

क्या सच मुच सब ठीक होगा अंत में

क्या सच मुच सब ठीक होगा अंत में ?
और हम -तुम खुश होंगे अंत में ?
तो बोलो किसका अंत होगा 
तुम्हारा, मेरा  या हमारे  दुखों का 
या हमारी छोटी छोटी खुशियों का 
जानती हूँ मैं , की जो भी है उसका 
अंत तो निशिचित है 
एक यही तो सच है  इस 
झुठी सी जिंदगी में
तो क्या हम रोज सिर्फ उस 
अंत के इंतज़ार में है 
और जी रहे है यह 
सच से परे एक झूठी सी जिंदगी
तुम और मैं रोज दिन ,हर पल........



Friday, 18 May 2012

"चाह" की "आस"

"चाह" की "आस" भी होती होगी
"आस" टूट जाये , दुःख तो होता होगा 
मैं तो दिन रात "आस "को मनाती हूँ
"चाह " किस रोज दुःख मनाने जाए.....

Thursday, 17 May 2012

यह ऊँची ऊँची दीवारों की बातें

यह ऊँची ऊँची दीवारों की बातें 
यह चाँद, तारे, सितारों की बातें 
यह सात जन्म निभाने की बातें 
बेमतलब , बेमानी लगती हैं 
मुझे प्यारी है वो चंद मुलाकाते 
वो थोड़ी थोड़ी मीठी सोगातें
वो पल-पल  में जीते ,जन्मो की यादें 
अनकही ,अनमोल तेरी दोस्ती है 



Wednesday, 16 May 2012

तेरे दिल की तन्हाइयां तुझे मुबारक हो

यह मुझसे दूरियां तेरी ,तुझे मुबारक हो 
यह दिल की मजबूरियां ,मेरी मुझे मुबारक हो 
मेरे दिल में आबाद रहे, तेरी यादों का मंजर 
तेरे दिल की तन्हाइयां तुझे मुबारक हो 

FARAZ

koi dekho to zra meri ye bebasi faraz …,
Hum sbhi k ho jaty hain koi hmara nahi hota







This must be true, i feel so sad, so very sad to read this, i wonder what "FARAZ" must have felt in writing this.  So painful

Monday, 14 May 2012

जखमे दिल

अब हर शक्श को रोक कर पूछो
जखमे दिल को बिखेरते हुए किसने देखा 

ऐसा क्यूँ लगता है की तुम आवाज़ दे रहे हो मुझे ?

भोर में उठते ही चिड़ियों का चहकना सुनकर 
ऐसा क्यूँ लगता है की तुम आवाज़ दे रहे हो मुझे ?

जब भी कभी मीठी सी धुप गुनगुनाती है 
ऐसा क्यूँ लगता है की तुम आवाज़ दे रहे हो मुझे ?

जब भी पढ़ती हूँ गीत ,गजल , अफसाने लोगों के 
ऐसा क्यूँ लगता है की तुम आवाज़ दे रहे हो मुझे ?

डाल से टूट कर गिरता है जब पीला पत्ता 
ऐसा क्यूँ लगता है की तुम आवाज़ दे रहे हो मुझे ?

चाँद का गुरुर देख कर ,जब तारों से मैं करती हूँ बात 
ऐसा क्यूँ लगता है की तुम आवाज़ दे रहे हो मुझे ?  






Sunday, 13 May 2012

तुम


तुमको ,जब याद  सब कुछ रहता था 
तो बोलो ,हमको कैसे तुम भूल गये .....

तुम


तुम लौट आओ मेरी जिंदगी में
तुम्हारे बिन जिंदगी मुसाफिर बन बैठी

खुद को माफ कर


हैरान तो मैं हूँ,परेशान भी ,सोच कर 
की तू मुझसे खफा है या खुद से खफा है
जो मुझसे खफा है तो मुझको  तो बता दे
जो खुद से खफा है तो खुद को माफ कर