Friday, 29 June 2012

नींद


जगती हैं आँखे ,जगा जगा सा है मन
फिर क्यूँ याद तेरी मेरे दिल में सोती है

कह तो दिया, नींद नहीं आती मुझको
फिर क्यूँ ख्वाब , तेरे रोज मेरी पलकों पे आते हैं।......

फिर न कहना की याद न किया तुझको 
अब जो दिन रात  का तेरा आना जाना है 

हमसफ़र मिल भी जायेंगे जो तलाश करें हम 
दिल का क्या करें , उसे भी तो मनाना है ........

Thursday, 28 June 2012

आस

आज फिर "आस" को खुद पर हंसी आई
आज फिर "आस" को खुद पर रोना आया........

Sunday, 24 June 2012

'ज़िया' ज़मीर


किसी को क्या पता जो महफ़िलों की जान होता है
कभी होता है जब तन्हा तो कितनी देर रोता है 

तेरी यादों के बादल से गुज़र होता है जब इसका
उदासी का परिंदा मुझसे मिलकर खूब रोता है 

‘ज़िया’ क्या शौक है चीज़ें पुरानी जमा करने का
ज़रा-सा दिल है दुनिया भर की यादों को संजोता है

गुलाबी गुरुर






गुलाबी गुरुर , आसमानी आसमान 
सफेद बादल रात के अँधेरे में गुम हो जाते हैं।
रह जाते हैं कई शिकवे ,अनकही बातें, तरसते ख्वाब 
चाँद के चेहरे पर जा महफ़िल लगाते हैं।....... 
(वंदना)