Thursday, 9 August 2012

मेरी आँख में तेरा अक्स है

मेरी आँख में तेरा अक्स है
तू कहीं नहीं है मेरे सामने
आंसू भी मैं बहा न सकूँ
तू छलक न जाये मेरे सामने



Wednesday, 8 August 2012

मुईन अह्सन जज़्बी

मेरी आंखों में अभी तक है मोहब्बत का ग़ुरूर
मेरे होंटों को अभी तक है सदाक़त का ग़ुरूर

मेरे माथे पे अभी तक है शराफ़त का ग़ुरूर

ऐसे वहमों से ख़ुद को निकालूं तो चलूं


मुईन अह्सन जज़्बी

Tuesday, 7 August 2012

तू जब कभी ग़ज़ल बन जाता है तो मुझे अच्छा लगता है

तू जब कभी ग़ज़ल बन जाता है तो मुझे अच्छा लगता है
तू जब दिल में ,मेरे गुनगुनाता है तो मुझे अच्छा लगता है 

Sunday, 5 August 2012

चाँद और मैं टकटकी लगाए एक दुसरे को देखते हैं

चाँद और मैं टकटकी लगाए एक दुसरे को देखते हैं
कितनी बातें हम कह जाते है बिना कुछ बोले
शब्द चुप रहते हैं अक्सर निगाहें बोल जाती हैं
रात ,हम दोनो को प्यार से अपने आगोश में बुलाती है
चाँद और मैं ,सपने में मिलते हैं , कह कर सो जाते हैं


और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना

और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना
कितनी मजबूर है मोहबत  यह  तू देख जरा
आह भर्ती है मोहबत  पर कहती नहीं
कितने अफसाने देखे है तूने   ख़त्म होते
कितने परवाने देखे है शमा पर  फन्ना होते
कितनी आँख से आंसू बहे मोम बनके
एक तू है की साथ मेरे जलता है
एक तू है की साथ मेरे पिघलता है