Thursday, 23 August 2012

मेरे पते पर मेरा नाम है

मेरे पते पर मेरा  नाम है
मुझे मालूम  है वहां कोई रहता जरुर है
लफ़्ज़ों की कमी कभी  महसूस न हुई
सीने में एक बेचैन दिल धरकता जरूर है।.......... (वंदना )

Tuesday, 21 August 2012

बेवकूफ मन


हर बार मुसीबत में मन हार जाता है
 फिर घबरा के जीना, मन जी लेता है।


Monday, 20 August 2012

तुम रहो बस ज़रा चुप चुप

फलक तक बात पहुँचने दें
जमीं को और सुलगने दें
तुम रहो बस ज़रा चुप चुप
ख़ामोशी को बात करने दें 

आदमी हकीकत है क्या की छलावा है




आदमी हकीकत है की छलावा है
कब किसने, किसको कहाँ पुकारा है
शहर सुनसान है , लोग वीरान हैं
आदमी गुजरे वक़्त में जीता रहता है ....


 

जैसे एक लम्हे को एक याद ने कैद किया हो एक उम्र के लिये

सुनहरी रात में जब छत पर बैठे थे हम तुम
उस अंधेरे में किस से हमे छुपाया था तुमने
वो  मेरे माथे से लट हटाते ही,उँगलियों  से
अधूरे शब्द में क्या  लिखा था मेरे होठो  पर ?
क्या लिखा था उस रात, तो मैं पढ़ नहीं पाई
पर मेरे बदन को वो सिहरन अब तक याद है
जैसे एक लम्हे को एक याद ने कैद किया हो एक उम्र के लिये 

दिल ही तो है



दिल धडक उठता है उनसे मिलकर 
बाकि हर वक़्त दिल खामोश रहता है।...

vipins poetry on school life

याद आता है बहुत वो गुजरा हुआ ज़माना
वो अपनी स्कूल की लाइफ वो बचपन का याराना
वो सुबह-सुबह मम्मी का हमको जगाना
और हमारा मम्मी को कहानियां सुनाना
वो गुस्से में मम्मी का डांटना
और रात में डैडी से शिकायत करना
वो असेम्बली  प्रयेर, वो असेम्बली का तराना
वो घंटी बजते हे क्लास से निकलना
वो लंच में जाकर छोले  -भटूरे समोसे खाना
वो तपती धुप में अजमल खान ग्रौंद में खेलने जाना
लेफ्ट राईट लेफ्ट राईट कहते हाथों  का उठाना
पि  टी टीचर को धोखा दे कर घुमने जाना
वो बात बात पर टीचर से जीद करना
वो गलतिओं पर मासूमियत से  सॉरी करना
वो रात को होमवर्क के वक़्त बहाने करना
और क्लास में मिस सिंघल से पनिशमेंट मिलना
लेट स्कूल जाने पर जेंनिफेर मेम से झाड़ खाना
और फिर दयावान मिस वढेरा का हमको बचाना
वो शरारतें वो कहानिया
लोग जिनको कहते थे शैतानियाँ
मुड़ कर देखता हूँ तो सोचता हूँ की
क्या जमाना था वो जो गुजर गया
वो जमाना कितना सुहाना था
वाकई क्या जमाना था ,वाकई क्या जमाना था

Sunday, 19 August 2012

याद आता है वो तेरा कागज पर "प्यार " लिखना

याद आता है वो तेरा कागज पर "प्यार " लिखना
और मेरा , उसे देख कर भी अनदेखा  करना