Friday, 31 August 2012

कितना मुश्किल है सच के सहारे जिंदगी काट लेना।

कितना मुश्किल है सच के सहारे जिंदगी काट लेना। मैं कभी अपने उस दोस्त को देखती हूँ तो समझ नहीं पाती, की किस गुनाह की सजा जी  रहा है वो , और कितने दुःख हैं, जिंदगी में जीने के लिए क्या सचमुच में भगवान् होते हैं, अगर हाँ तो फिर क्यूँ इतना दुःख है जीवन में। भगवान् जहा हो वहां तो सुख होना चाहिये न????।। मेरी नन्ही सी बच्ची, कैसे तड़प उठती है।।। कहाँ है भगवान् वहां???/
क्यों है इतना दुःख वहां?? किस विश्वास की कमी है।?? पिछले जन्म का कोई अपराध?? तो एक आदमी के साथ सब लोग क्यूँ काटते  हैं कारावास?? कैसे भगवान् अलग अलग लोगों का भाग्य एक साथ पिरोता है??? कितना फालतू टाइम है न भगवान् के पास।।।।।।

एक तूफान है जो सीने में पल रहा है

एक तूफान सा है जो सीने में पल रहा है
दिलासा दिया था उसने की ख़ामोशी से गुजर जाएगा









तेरी यादें

बंद कर लूँ मै आंखे ,कहीं उफन न जाए
तेरी यादें है जो मचल-मचल  के याद आती है

आँख से निकलता नहीं है अब

आँख से निकलता नहीं है अब
तेरा अक्स है , की तेरा ख़याल है ?????

Thursday, 30 August 2012

तुम्हारी यादें

मुझे भी मुक्ति चाहिये, थोड़ी नहीं पूरी  

काश तुम्हारी यादों को मैं 
जीवन की किताब के किसी
पन्ने की तरह फाड़ कर फेंक सकूँ
पर जब मन सो जाए तो धीरे से
पन्ने को सीधा कर तकिये के  नीचे रख सकूँ
सोचती हूँ तुम्हारी यादें  सपना बन कर
मेरी नींद में आने लगेंगी
तो फिर यह कैसी मुक्ति होगी
थोड़ी ? की पूरी ???????

काश तुम्हारी यादों को एक संदूक में
बंद करके समुन्द्र में बहा सकती
अगर कभी किसी को
मिलता यह यादों से भरा संदूक
और वो खोलता तो वो सब यादें
मुक्त हो आकाश में उड़ जातीं
और  फिर मेरे पास लौट आतीं
और मुझे कोसती, की मैने क्यूँ
उन्हे अपने से दूर जाने दिया
तो फिर यह कैसी मुक्ति होगी
थोड़ी ? की पूरी ???????????

Wednesday, 29 August 2012

उसको मालुम तो है ,पर यह नहीं मालुम

उसको मालुम तो है ,पर यह नहीं मालुम
की  वो कितना प्यार करता  है मुझसे ??????

Tuesday, 28 August 2012

हम साथ साथ मुस्करा सकें

ऐसा कुछ भी नहीं था मुझमे की
तुम मुझे भूल न सको
पर कहीं कल अचानक कोई जिक्र हो
किसी और  की
पर तुम्हारे जेहन  में मेरी आकृति उतरे
तो मुस्करा जरुर देना
क्योकि सिर्फ इतना ही तो चाहा
था मैंने तुमसे
की कभी हम साथ साथ मुस्करा सकें .....

Sunday, 26 August 2012

पत्थरों से टकडा उठी हैं तनहा लहरें

पत्थरों से टकडा उठी हैं तनहा लहरें
किनारों को हिलाने की कोशिश में।.......(वंदना)