Saturday, 8 September 2012

एक एहसास

एक एहसास सा है तू दिल में समाया सा
हवा का झोका तू बन मेरे  दिल से निकल जा।।।।।

Friday, 7 September 2012

Javed Akhtar

मुझसे नाराज़ हो तो हो जाओ
खुद से लेकिन खफा खफा न रहो
मुझसे तुम दूर जाओ तो जाओ
आप अपने से तुम जुदा न रहो

मुझसे नाराज़ हो.....

मुझपे चाहें यकीं करो न करो
तुमको खुद पर मगर यकीन रहे
सर पे हो आसमान या कि न हो
पैर के नीचे ये ज़मीन रहे
मुझको तुम बेवफा कहो तो कहो
तुम मगर खुद से बेवफा न रहो

मुझसे नाराज़ हो.....

आओ इक बात मैं कहूँ तुमसे
जाने फिर कोई ये कहे न कहे
तुमको अपनी तलाश करनी है
हमसफ़र कोई भी रहे न रहे
तुमको अपने सहारे जीना है
ढूँढती कोई आसरा न रहो

मुझसे नाराज़ हो तो हो जाओ
खुद से लेकिन खफा खफा न रहो
मुझसे तुम दूर जाओ तो जाओ
आप अपने से तुम जुदा न रहो..!!
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                      --Javed Akhtar
तुमसे क्या कहें , क्या बात करें
दिल, की यह मर्जी है की हम चुप चाप रहें

Wednesday, 5 September 2012

मेरे दिल का सौदा लेकर

मेरे दिल का सौदा लेकर
निकल पडे हैं शब्द बेचारे
तुझसे मिल नहीं पाए
तो लौट आएगे हारे हारे ......

Sunday, 2 September 2012

दिल मेरा धडकता है, वो बादलों से निकलता है।।।।



हुई मुश्किल की अब इबादत किसकी करूँ
दिल से "तू" जुबान से "तू" ईमान से "तू" निकलता है
चाँद पागल है , आवारा है , बैचैन है
दिल मेरा धडकता है, वो बादलों से निकलता है।।।।