Saturday, 15 September 2012

आदत

आदतन हम तो जी लेतें है तन्हाई के साथ
तुम जो भीड़ से निकलते हो तो क्या खोजते हो ???? 

Wednesday, 12 September 2012

जिंदगी जीने की आरजू नहीं रहती

जिंदगी जीने की आरजू नहीं रहती
अजनबी सी राहों का
अजनबी मुसाफिर सुन
जिंदगी जो मेरी है
यह जिंदगी जो तेरी है
यह तो एक कहानी है
कहानी में आते ही
कहानी से जाते ही
लोग याद रखते हैं
लोग भूल जातें हैं
कहानी में तनहा मैं
कहानी में तनहा तू
यूँ ही मर मर  कर
जिंदगी गुजारी है .

बादल नहीं, वो तेरा साया है।।।।।।।।

तेरी , खुशबू है हवाओं में
या फिजा ने इत्र लगाया है
आँखें बंद जो कर लूँ मैं
बादल नहीं, वो तेरा साया है।।।।।।।। (वंदना)

Tuesday, 11 September 2012

रेत पर लिख कर तुम्हारा नाम

रेत पर लिख कर तुम्हारा नाम
खुद ही हथेली से मिटा दिया था
डर था की समुंदर की लहर आती
और तुम्हे साथ अपने ले जाती

Sunday, 9 September 2012

कोई मेरा दिल चुरा कर चला गया

कोई मेरा दिल चुरा कर चला गया
कोई मेरे गीत गुनगुना कर चला गया
मैं कहाँ जाऊं, क्या कहूँ  क्या करूँ ??? ए दोस्त
कोई मेरे दिल पर हक जमा कर चला गया




तेरे बिना भी तो हम जी रहे थे कभी

  हर सांस में है तू, हर लम्हे में मोजूद
तेरे बिना भी तो हम जी रहे थे कभी

ME WHEN I AM JUST ABOUT TO GET DRUNK

आज यकीन हो गया की मिर्ज़ा ग़ालिब ने कितनी सारी  नज्म, गजल, पीने के बाद ही  लिखी होगी।। साली, हर पंक्ति पीने के बाद शाएरी जैसी लगती है।।।।

जैसे।।।।। अर्ज किया है।।।

होशो हवास गुल हैं
पर तुम खूब याद हो।।।।।।


या फिर।।।।।

लायी हैं रंग फिर से तेरी याद यूँ भी
दिखाई दिया तेरा चेहरा शराब में भी


या फिर।।

तुम मुझे भूल जाओ
मुझसे मिलो भी नहीं
हम भी मायूस से हैं
पर मजबूर नहीं।।।।।।

साला दीमाग है की।।। शाएरी उगलता है।।। I can talk shayeri... i can waLK SHAYERI.... I CAN LIVE SHAYERI.


HOPE YOU ARE OK BANNA TO REMEMBER ALL THIS...

चाँद कुछ तो कहता होगा न

जो चाँद दीखता है मुझे, वो तुझे भी दीखता होगा न
तड़प कर मेरी आहों से चाँद भी तो रोया होगा न
आई है रात जालिम सी , मैं चुप हूँ, मगर तू सुन ले
मेरा दिल पढ़ कर रातों को ,चाँद कुछ तो कहता होगा न (वंदना)