Thursday, 27 September 2012

जो तुम उदास रहते हो

जो तुम उदास रहते हो
और मुझसे भी नहीं कहते
मेरे दिल की बैचेनी क्यूँ
कुछ ज्यादा शोर मचाती है?

जो तुम चुपचाप यूँ रो लो
और मुझे मालूम भी न हो
तुम्हारे  शहर का बादल क्यूँ
मेरे शहर में बरसता है ?

जो तुम्हारे सपने न पूरे हों
युहीं कभी जो अधूरे हों
मेरी खुली आँखों में क्यूँ
ख्वाब यूँ लहराता है .........












Sunday, 23 September 2012

मेरे खोए जज्बात , मेरी अनकही बातें


मेरे खोए जज्बात , मेरी अनकही  बातें 
कितने लोगों को मैने खुद सुनाई है
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सुकून के पल में बसती तन्हाई है
मैने यह बात तुमको पहले भी बताई है

हर एक शक्श है गुम, खुद को पाने को
कैसी यह भीड़ है कितनी तन्हाई है

गुजरते वक़्त में खोए कुछ पलों में उतर
हम भी आज  थोडा सा  सुकून ढूंढ़ते हैं।   (वंदना)






                  

झुठ के पाँव नहीं होते

झूठ  के पाँव नहीं होते
झूठ अपने साए के साथ बराबर चलती है मगर
हम झूठ  में भी किसी दबे  सच को ढूंढ़ते हैं

वो समझते हैं की हमको मालुम नहीं
जो बीती है, वो  सच में बीत गयी है
फिर भी सीने में जलती है, उस  आज की आग

एक दिन मिल तो मुझसे,  कही तू  "खुदा"
तेरा बन्दा हूँ तुझसे  मिला चाहता हूँ
तेरी मर्ज़ी का चर्चा, नहीं करुँगी ,तेरी कसम

यूँ पाँव के कुछ घाव दिल से पूछ्तें हैं
तू  जो हर वक़्त दर्द में डूबा है , ये बता
यह जख्म भर तो जाएँगे  न कभी ????