Friday, 5 October 2012

"तुम्हारी याद" ...

सुबह आज देर से उठी है
लबों पर  एक अनदेखी मुस्कान लिए
दुपट्टा संभालती , यूही गुनगुनाती
अधरख की चाय में घुल कर
सुनहरी  धुप में बाल सुखाती
"तुम्हारी याद " आज खुश दिखती है 

रात के पिछले  पहर , में सिहर कर 
उठती ,फिर सो नहीं पाती
चाँद को बादल में छुपते -निकलते
देखती, मुस्करती ,  फिर आहें भरती
सुबह के इंतज़ार में जगती -सोती
"तुम्हारी  याद" आज दुखी दिखती है
और मैं , रोज  अपने दिल से कहती हूँ
की आज देखें किस "मूड "में उठेगी "तुम्हारी  याद" ...

Monday, 1 October 2012

अब तुम्हे रोज भुला कर देखते है न



हर तरफ शोर है, भीड़ है ,आपाधापी है 
कुछ रोज युहीं अकेले कहीं  रहते है न 
 

धुप जब भीगती है बारिश में यूँ 
सुनहरा रंग तो काला पड़ता  है न 

नींद मुश्किल से आती है कभी कभी 
कभी नींद से न जाग कर  देखते हैं न 

काफिले जातें है धुल की गुबार लिए 
धुल में तेरी तस्वीर बनाते है न।

मोहब्बत तो कर  ली हमने तुमसे 
अब तुम्हे रोज भुला कर  देखते है न 

Sunday, 30 September 2012

रात को सो न सकी मैं।।।।। randomites

मैने  ही चुन लिया "सांझ " का चेहरा
सुबह, मैं  उठ नहीं पाई, रात को सो न सकी मैं।

तुम्हारे बिन गुजारे हैं कुछ ऐसे दिन हमने
की हर सांस निकलती है  एक उम्र के बाद

तन्हाई मेरी उदास है ,तनहा जो रह गयी
हर लम्हा जो तुमको दे दिया अपने वजूद का