Wednesday, 24 October 2012

सरसराती हवा कोई गीत सुनाती है

सरसराती हवा तुम्हारे   गीत सुनाती है

गीत जो आज कल तुम नहीं गुनगुनाते
बस मन में कहीं लिख कर रख देते हो
और जब मन  अशांत हो फडफडाता  है
तो तुम उस कोने में छुपने की कोशिश में
गीत को रिहा कर देते हो
तुम्हारे गीत ,स्वतंत्र हो हवा में गुनगुनाते हैं

और मैं फिर से लौट पाने की कोशिश में
दिल के किसी कचोट में  खुद को तलाशती फिरती हूँ
जहाँ एक दिया सा धुकधुकाता  है
बुझ जाने की कोशिश में  फिर से जलता  रहता  है
और जब हवा की सरसराहट पास से गुजरती है
तो मैं जान जाती हूँ की तुम्हारे गीत आज आजाद हैं
और मैं उस दर्द  से निकल तुम्हारे गीत ढूँढती हूँ

यह वही गीत हैं जो तुमने अभी लिखे नहीं
केवल सोचें हैं।
पर फिर कैसे सरसराती हवा तुम्हारे  गीत सुनाती है????








Tuesday, 23 October 2012

आज फिर एक सुहाना सा  सपना देखा
खुद को सपने में भी बड़ा तनहा पाया

घंटों, भीड़ में  घुमते  रहे हम-तुम
हाँथ जब तुमने छोड़ा मेरा तो, तनहा लगा

एक उम्मीद है की फिर से जी लूँ वो पल
कितनी मुद्दत से वो पल अकेला रहा

Sunday, 21 October 2012

आबले सीने के उबल कर

आबले सीने के उबल कर
आसमा में पहुंचे तो बरसात हुई

तुमसे तो मिलती रही  ख़ुशी
हमको  गम से लम्बी मुलाकात हुई

आज का दिन भी युही किनारे पर सो गया
हमको तुमसे मिलने की झूठी आस हुई