Saturday, 3 November 2012

मुखोटे



मत सोचो, मत देखो मुखोटों के उस पार
लोग हर वक़्त नए वस्त्र बदलते रहते हैं ..

कितने चैहरे हैं  हँसते,  तस्वीरों से
कितना  रोते हैं, कितना  बिलखते रहते  हैं .............

चाँद और मैं।।।।।

कल जब  छत पर सबकी  तू  उतर आया  चाँद
कितनी प्यासी आँखों ने तुझे  सर पर बिठाया होगा ???

एक मैं हूँ की हर  हाल में तुझे प्यार करती हूँ
तारीखों की बंदिश में बंधने से हमारा क्या होगा ???





Friday, 2 November 2012

मदिरा को नशा करा सके कोई

मदिरा को नशा करा सके कोई 
पत्थर से नीर बहा सके कोई
मेरे दिल से तुझे हटा सके कोई
मुझे ऐसे, किसी की तलाश है




Tuesday, 30 October 2012

तुम्हारी याद


कोट की जेब में उंगलियों में ऊँगली उलझाती
सर्दी की सर्द हवाओं में कंपकंपाती
ठिठुर कर फिर  पास सिमटती जाती है
तुम्हारी याद

नए से शहर में दूर तक  जाती
कभी भीड़ में गुम हो जाती
कभी अंधेरे से  डर कर  लौट आती है
तुम्हारी याद

गले में मफलर सी लिपट सीने तक लहराती
कभी कानो पर  गर्म हथेली बनती
कभी बियर की बोतल पर ठंडी बूँद बन कर उतरती है
तुम्हारी याद