Saturday, 17 November 2012

हलचल पूछ बैठी

दिल से मेरे, एक अजनबी सी  हलचल पूछ बैठी
धरकन तेरी आज इतनी खामोश सी क्यूँ है ????


Thursday, 15 November 2012

कहाँ पढ़ा था तुम्हे, कुछ याद नहीं
दिल में ही रहो अखबार न बनो
(वंदना)

धनक


मजबूर है यह बादल बरस जाने को
फूल भी बेचैन है आज कल में खिल जाने को

तितलियां उडती हैं मस्त फिजाओं में
चिड़ियों ने राह पकड़ी है हवाओं में

एक मैं हूँ की तेरी आस में बैठी  हूँ
सब तो खुश हैं बस मैं उदास बैठी हूँ

मेरे ख़्वाबों से निकलता तू और उतरता जमीं पर
धनक बन गया न जाने कब , बादलों में छुप कर







Wednesday, 14 November 2012

कुछ यूहीं

हर सांस की कीमत अगर अता होती
जिंदगी जीने की वजह भी एक दुआ होती

मुझको आती है हँसी अपनी तक़दीर पर
मिल जाया करती  है मुझसे सपनो की देहलीज पर

क्यूँ चले आते हो रोज ? तुम  थक जाओगे
ख्वाब में आते-जाते,कही तुम बिखर जाओगे 




Sunday, 11 November 2012

तुम्हारा नाम तो मीत है न ?????


मैं पूर्ण-विराम की कैद में बंद 
शब्दों की पंक्तियों से  रचित 
व्यक्त होने  को व्याकुल 
गुमनाम सी अनुभूति हूँ 
मेरा नाम नीर है
तुम्हारा नाम तो मीत है न ?????

Happy lonely Diwali Banna 2012


तुम कहती हो तो चुप रह के देखती हूँ कुछ दिन
अगर याद आए मेरी, तो बहारों से पता पूछ  लेना।
मेरे हर दर्द  के असहाय साखी है फिजा
अपने हर रंग में छुपा कर रखा है  मुझे