Saturday, 24 November 2012

साया


घर की दीवार पर  चढते अपने साये को 
धुप ढलते ही जमीन पर बिखरते देखती हूँ 

Friday, 23 November 2012

उसकी याद

थोड़ी सी जमीं , थोड़ी आसमां पर
बिना पंख के उडती रहती हूँ
मैं, उसकी , याद हूँ,  उससे  दूर
हर सुबह जीती हूँ सांझ ढले मरती रहती हूँ (वंदना)

Tuesday, 20 November 2012

बेवफाई


बेवफाई 

बेवफाई का भी ,एक हसीं मौसम जरुर होगा 
की अक्सर लोग नजरें बचा कर जीने लगते हैं।