Saturday, 1 December 2012

anaam

"वास्ता हुस्न से या शिद्दत ए ज़ज्बात से क्या ,
इश्क को तेरे कबीले या मेरी जात से क्या ,
मेरी मसरूफ तबीयत भी कहाँ रोक सकी ,
वो तो याद आता है उस को मेरे दिन-रात से क्या ,
प्यास देखूं या करूँ फ़िक्र कि घर कच्चा है ,
सोच में हूँ कि मेरा रिश्ता है बरसात से क्या ,
अब वो कहता है के क्या लोग कहेंगे कल को 
कल जो कहता था मुझे रस्मे रिवायात से क्या..." (Anaam)

Friday, 30 November 2012

तनहा लोग


हुई मुश्किल की, भीड़ भरी दुनिया  में 
लोग,  तनहा से जीते और मरते रहते हैं 

Wednesday, 28 November 2012

अंतर्द्विन्ध्

अंतर्द्विन्ध्

अब कुछ नहीं कहूँगी
कुछ भी नहीं
मैं बिलकुल चुप रहूंगी
बिलकुल
सांस भी नहीं लुंगी
बिलकुल नहीं
तुम देखना , मैं जी लुंगी
एकदम
सांसो में तुमने जाल बिछाया है
गहरा
आँखों से आंसू मेरे बहेंगे
हाँ बहने दो
दिल को बंद करना है
निसंकोच करो
भूल जाउंगी तुम्हे
जल्दी करो
अब तुम भी कुछ मत कहो
अच्छा
अब तुम भी चुप रहो
बिलुकल
मेरी दिल की हलचल में
तुमको चुप होना होगा
मैं जब दिल से बात करूँ
तुमको जाना  होगा .....




Tuesday, 27 November 2012

The main barriers of listening



Just  had written  this on my blog and wanted to share it here ,  just wrote what came in my mind . The main barriers  of listening are noise, tiredness, being judgmental, own mind in solution mode. I feels it is  difficult to drop everything which your mind is thinking and almost magically visit somebody else's world, see through their eyes, and listen what they want to say , after all "listen" is an anagram of"Silent". be silent, but attentive, don't speak in between, don't interrupt, don't ask too many questions, don't change the subject, don't give your point of views.

Monday, 26 November 2012

तू साथ, चल तो मेरे,

तू साथ, चल  तो  मेरे,
गम की जमीं बाँट लेंगे
गीला गीला आसमान ओढ़ लेंगे
कभी  खुल के हंस लेंगे
कभी घुट के रो लेंगे
तू साथ तो चल मेरे
कभी अंधेरे से निकल कर
रौशनी पकड़ कर
हम दौडते फिरेंगे
तू साथ चल तो मेरे