Saturday, 21 December 2013

सूरज छुपा भी है

सूरज भी आज "चाँद"  जैसा लगा 
आज दिन भी है, अँधेरा भी है, सूरज छुपा भी है 

Wednesday, 11 December 2013

दिल में थोडा  दर्द सा होता है
तुम्हारे और मेरे रास्ते अलग हुए हैं शायद। .. 

Friday, 6 December 2013

randomites just yunhi

कैसा आलम है कि तन्हाई भी
शराब पीती है तनहा होने  के लिए

एक ही घर है और घर कि छत  भी एक  है
कैसे जी लिए हम=तुम   दो मकानो में

मिलता जो  दिल  दूकान में कहीं
खरीद लाते हम, जमाने  भर  के लिए 

My brain goes HMMMMMMMM

wow, the wine make my brain
go  hmmmmmmmmmmmmm
it sings and dance on it own
and my fingers have the brain
of their own
but my heart... oh my poor poor heart
it tells GOD (if there is one)
Please preety please
Its enough for ME
Please preety please
send your cruel Yamraj (if there is one)
Please preety please
take me away
when I am still young.
AM I STLL YOUNG?????
My brain goes HMMMMMMMM
 

Thursday, 5 December 2013

हौले से खटकाया है

झुंझला के बादल ने
खिसला के चंदा ने
तारों  का  जाल बिछाया है 

तेरा पता पूछने को
मेरे दिल के एक  कोने को
 किसी ने हौले से खटकाया है

 

Wednesday, 4 December 2013

दिल

टुटा तो है और अब बिखर जाएगा
दिल ही तो है,कोई बड़ी बात नहीं 




 

Tuesday, 3 December 2013

सुनहरे सिक्के के दो रंग

हर एक सिक्का है दो तरफ़ा

एक  है रंग सुन्हरा
दूसरा  मुझे दीखता नहीं
एक है सोंच मेरी
दूसरी मैने सोची नहीं
एक में अक्स मेरा झलकता है
दूसरा बेबाक जहन में कहीं रहता है
एक है दुनिया और दुनिया के दस्तूर कई
दूसरा बेबात, बे मतलब जिया जाता है

हर एक सिक्का है दो तरफ़ा
 

Saturday, 30 November 2013

और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना
नये मुसाफिर को राहें गुमराह करती हैं
हर एक ठौर को ,पगला मंजिल समझता है
हर नयी उम्मीद पर दिन बदलता है
हर नये ख्वाब को दिल, सच समझता है
एक तू है की साथ मेरे जलता है
और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना...


और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना
कितनी मजबूर है मोहबत  यह  तू देख जरा
आह भर्ती है मोहबत  पर कहती नहीं
कितने अफसाने देखे है तूने ख़त्म होते
कितने परवाने देखे है शमा पर  फन्ना होते
कितनी आँख से आंसू बहे मोम बनके
एक तू है की साथ मेरे जलता है
एक तू है की साथ मेरे पिघलता है

और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना

और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना
हर आस ,हर उम्मीद धुआं धुआं सा है
दिल-ए-अरमान भी बुझा बुझा सा है
एक तेरी लौ जो टिमटिमाती  है
कभी बुझती है कभी खुद से जल जाती है
एक सुरंग से आती रौशनी की तरह
 तू  ही है की साथ मेरे जलता है
और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना

और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना 
रास्ते में हैं अंधेरे  नसीबों की तरह 
हर एक मुस्कान के पीछे  रुसवाई  है  
हर शख्स से दूर उसकी परछाई हैं 
एक तू है की साथ मेरे जलता है 
 और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना 
 





 

Tuesday, 26 November 2013

तकदीर

हाँथों कि चंद लकीरें जब मिलती है
मेरी हथेली से तेरी हथेली तक
कभी देखा है कैसे उठ कर हम -तुम
समय की तकदीर बाँटते  हैं

Monday, 25 November 2013

सच और झूठ

आँखों में  डूबता हुआ झूठ
पलक झपकाता   नहीं,
कि बह  न जाए कहीं
सच की आगोश में।



 

Saturday, 2 November 2013

तेरे माथे पर टंगी तीन लकीरें
मुझसे पूछती है, कि मैं कौन हूँ तेरी??????

 

Tuesday, 29 October 2013

तेरी आवाज मुझ तक आती है
दर्द के साज भी गुनगुनाती है
तू आजाद कर दे मुझे अपनी यादों से
मेरी रूह भी अब छलनी  हुई जाती है.



 

Monday, 28 October 2013

चाँद से खफा खफा सी चाँदनी
 रात आँगन में मेरे रहने आयी  है
 
याद बन बन कर गिरे मेरे आँसू
चाँद से रूठ कर चांदनी भी आयी है




 
मेरी  ही धुप में सुलगता मेरा साया
तुम्हारी छाँव को तलाशता है

 

Monday, 21 October 2013

वो आसमान पर  रहे तो रहे ,मगर फिर भी
ज़मीं से मिलते ही नजरें चुराता  तो होगा।
 

तुम


मैं जब भी खोलती हूँ  बरसों की बंद चिठियाँ
तुम धीरे से उतरते हो मेरे जहन की सीढियाँ 

Friday, 4 October 2013

तुमसे ही

कोई पागल सी नजर मुझको छुके जाए तो
भरी महफ़िल में अचानक तेरी याद आए तो
सामने वाले से बात मैं  कुछ भी करूँ
जहन के पिछले हिस्से में तू बस जाए तो    

randomites just yuhin

वो बीते हुए हसीं पल जो दिल में बसें हैं
जैसे मेरे जीने के लिए थोडा वक़्त निकालतें हैं

अपने लिए भी अब समय से बात कर सकूँ
इस कदर रोज समय को बिताना पड़ता है

दिल का  सुनना आज-कल तकलीफ देता है
दिल का क्या है , इसे तो  आदत है रोने की

खुद के लिए "समय" से दोस्ती की थी
"समय" ने भी तुझ तक जाने की जिद की है

मेरी कल्पना के मुसाफिर मुझे इतना तो बता
"वक़्त" का तुझसे और मुझसे रिश्ता क्या है ??


 

समय

खुद से मिल सकूँ इसलिय 'समय' से दोस्ती की थी
अब 'समय' ने भी तुझ तक जाने की जिद की है

Thursday, 3 October 2013

रिश्ता

मेरी कल्पना के मुसाफिर मुझे इतना तो बता
'वक़्त' का तुझसे और मुझसे रिश्ता क्या है ???

Saturday, 21 September 2013

जहाँ पहुँचने  में मेरे दो -चार दिन  जाया होते हैं
वहाँ ,कैसे तुम्हारी यादें, मेरा इंतजार  करती हैं?

Thursday, 12 September 2013

randomites kuch yunhi

 


मेरी मासूम  ख्वाइशें पढ़ती रहती है
तुम्हारी अनकही बातें,तुम्हारी बोलती खामोशी। ……

मिलेगी कभी  मंजिल, भी तो पूछेगी
किस तरह राह बदल बदल कर मैं पहुँची  तुझ तक।

मेरी यादों में ही जीते रहे तुम रोजाना
 मरने को तो ख्वाब मेरे रोजाना मरते हैं

डायरी   के पन्नों में खोजो खुद को
हर पन्ने की मोड़ पर तुमको छुपा रखा है

गहरी साँस है जो तुमको पढ़ती है ,चुप रहती है
दिल भी ख़ामोशी से सर झुकाए रहता है







 
गहरी साँस है जो तुमको पढ़ती है ,चुप रहती है
दिल भी ख़ामोशी से सर झुकाए रहता है
डायरी   के पन्नों में खोजो खुद को
हर पन्ने की मोड़ पर तुमको छुपा रखा है 
मेरी यादों में ही जीते रहे तुम रोजाना
 मरने को तो ख्वाब मेरे रोजाना मरते हैं

Wednesday, 11 September 2013

तुझ तक।

मिलेगी कभी  "मंजिल" भी तो पूछेगी
किस तरह राह बदल बदल कर मैं पहुँची  तुझ तक। 

Monday, 9 September 2013

खामोशी।

मेरी मासूम  ख्वाइशें पढ़ती रहती है
तुम्हारी अनकही बातें,तुम्हारी बोलती खामोशी। …… 

प्रक्रति का नियम हूँ शायद

सुर्ख गुलाब की पंखुड़ी पर
ओस की बूँद सी पड़ी हूँ मैं 
बस कुछ देर का भ्रम हूँ शायद
सूरज की गर्मी में उड़ जाऊं शायद
या भी नन्ही चिड़िया कोई पी जाए शायद
गिर के धूल में मिल जाऊं शायद
या फिर तितली के अंग से लिपट जाऊं शायद
मेरा, मैं और मुझसा कुछ भी नहीं
प्रक्रति का नियम हूँ शायद



Friday, 6 September 2013

मेरी निगाहें

चलती जाती हैं मेरी निगाहें दूर, तुझे खोजने
कभी मिल जाए अगर तू तो निगाहे झुका सकूँ 

तुम

जाने कब पहलू  से दूर हुई तुम
अभी तक दुपटे का कोना गीला- गीला है 

Friday, 30 August 2013

मैं शिकवा भी तेरी शाएरी से कैसे करूँ??

तेरी कविता में रूप मेरा निखरता था ,
तेरी हर ताल ने  दिल मेरा धड्काया था
मैं शिकवा भी तेरी शाएरी से कैसे करूँ??
तेरे गीतों ने मुझे जीना -मरना सिखाया था









































 

अब कुछ ऐसा कहें की न कहें


चाँद भी आवारा सा बादल बादल फिरता रहा 
सूरज कभी निकल पेड़ों से सागर में गिरता रहा 
मेरी दास्ताँ सुन लहर ,कैसे तनहा तनहा  मचलती रही 
मैं बैठी रहीं तेरी याद में साया आवारा फिरता रहा ,,,,,,





 

Tuesday, 27 August 2013

All about me, and this person who lives inside my body

Arti says, you love to talk... and you talk a lot... so what am i suppose to do, should i not be grateful that people call me up to talk. should i be like other people, who dont give time to other people , or pretend that they dont have time.

I feel sad, today, i would say... that people expect a lot..it feels as if i have to be happy for other people, i have to be chatty for other people. as if nothing is left of me.

what is me than.?? let me think

what is me.

the person who lives inside the  body  of vandana is very caring person, it melts, if it listens to any sort of problem. it is always there, when somebody needs Him/her.. Its a very fun loving person.. it laughs with everybody, it cries for anybody.

It likes to be center of attention, but dont like to indulge in attention. it gets very shy if somebody thanks, compliments her/ him

It is very trustworthy, people like to share problems with it. people give acknowledgement to wherever it go.

it makes friend very easily,but lets very few people to come near it. and if somebody is near it, than it like to protect that person, give hundred percent  to that person. it might affect its own immediate family, but thats what it is me.

this person is very possessive. this person gets very easily hurt. this person does not like to hurt anybody
this person is very temperamental
this person is very bossy
this person is very loving
this person pretends to forgive
this person never forgets.(well old age is creeping up and making it forgetfull)
this person is easily hurt by small thing
this person. gets very scared of emotions.
this person is very loud
this person believes that there is a power which look after this person and is very grateful for it




Sunday, 18 August 2013

मेरी जिंदगी तू मुझे ये बता
मुझे भूल कर तुझे क्या मिला (not written by me)

Saturday, 17 August 2013

अब छोड़ दिया है,यादों में आना- जाना
जिंदगी बोल , अब जियेगी कैसे ?????

Monday, 12 August 2013

क्यूंकी मेरा नाम मोहब्बत है

और तुम जो पूछ  पाते मुझसे, की अब जाना कहाँ है ?
की अब रास्ता  कहाँ है ? और अगर मैं कह पाती
की तुम्हारा और मेरा रास्ता
दूर बहुत दूर, कहीं  एहसासों में पड़ा है
जहाँ हम कभी नहीं मिल पाते, पर फिर भी रोज मिलते हैं

और मैं अगर पूछ पाती की हम पहले कब मिले थे ?
तो तुम जरुर बोल देते अरे कल ही तो। … शायद पिछले जन्मों  में.
मैं फिर से  यादों में खो जाती,शायद पिछले जन्म तक जा पाती
नए सपनों  में सजा ,तुमसे रोज मिल पाती
तुमसे रोज नए वादे करती और रोज नए वादे तोडती

और मैं अगर  वक़्त को रोक पाती और पूछ  पाती उससे  की वो
दिन और रात का गुलाम क्यूँ  बना बैठा है?
सोचो कितना अच्छा  होता
अगर , दिल ढलते  ही  वक़्त सो जाता
और सूरज के साथ वक़्त भी निकलता
मैं रोज वक़्त को नए गीत सुनाती

और लोग…. उफ़ ये टेड़े -मेढे  लोग
हर एक पंक्ति में तुम्हे खोजने जाते है
जाने कितना वक़्त गवातें   हैं
तुम जो मेरी भावनाओ में कैद हो
यहाँ पन्नों पर कितना  खुश दिखते हो
हर नए शब्द में साँस  लेते  हो
हर  एक पंक्ति पर झूम उठते हो

और मैं "हम-तुम" को जन्म देती रहती हूँ
कभी भूलने नहीं देती, कभी मरने नहीं देती
क्यूंकी  मेरा नाम मोहब्बत है
क्यूंकी  मेरा नाम इबादत है
 

Saturday, 10 August 2013

echo

ए बाजी ईईइ  …. 
बुई ले ऐयेह ,
बाजा ले ऐएय , 
खिलौना ले ऐयेह ......

Sunday, 4 August 2013

तुम्हारे लिए


तुम्हारे लिए

पलकों पर फड़-फड़ करती
आई थी मैं तुम्हारे लिए
सपनो में उडती हूँ रात भर
थकती नहीं , रूकती नहीं
बस तुमको देख कर
थम सी जाती हूँ
तुम्हारी पलकों तले
बन के आंसू कभी पिघल जाती हूँ
कभी होठों के आखरी कोने
की हंसी बन ठहर  जाती हूँ
भीड़ की  तन्हाई का पल
वो पल , बस एक पल बन कर
जेहन से आँखों की
फिर आँखों से दिल की
दूरी में सिमट जाती हूँ
मैं तुम्हारा ख्वाब हूँ
एहसासों  की मीठी बैचैनी
लिए साथ तुम्हारे रहती हूँ.................... (वन्दना )






मुस्कराने ,की कुछ ऐसी लत लगी
आँसू  भी मेरे हंस कर गिरते हैं

 

Tuesday, 30 July 2013

कहानी randomites.



जिंदगी की किताब को  कई बार पलट कर  देख लिया
पन्नो पर पड़ी  धूल भी नयी दास्ताँ सुनाती है

कहानियाँ,पढ़ा करती थी, सुना करती थी मैं
खुद को कहानी बनते हुए देखती हूँ आज-कल

जिंदगी, यूँ भी मुझसे कतराती रहती है
शक्ल बदलती नहीं , नए लिबास में मिला करती है

मौत का क्या है, आयगी ,जरुर आयगी
किश्तों में कट जायगी जिंदगी भी





Friday, 26 July 2013


जेहन में सिलवटे,हैं तुम्हारी यादों की
दिल पर जख्म गहरा है तुम्हारे वादों का
 

आस

चुप हो गए हैं "आस" मेरे, शब्दों के जाल में
जहन में रहते थे मेरे कितनी  शान से ।।।। (वंदना)

Tuesday, 23 July 2013

My day today

I must write down how my day started today, The days like this even though there is nothing event full for me, it sticks to my brain like glue. First thing in the morning, I heard the news of a close friend, having  thyroid cancer. I did not understand why that lady chose to tell me out of all the people, may be she had told everybody and everybody is keeping quiet for her sake, so she is not disturbed. My heart went out for her, only last Wednesday at Vidya's house we have laughed so much, about silly things.

I feel sometimes, GOD feels threatened if we laugh about silly thing, HE is too serious to understand, how mortals can laugh at things, with a lot of unhappy stuff happening around them. He makes it a point to make us unhappy, to show how powerful He is.. Times like that I don't like God. I wish God was more like a friend, to be around at the time of need, otherwise he could do HIS ACT, which he is best capable of which is DISAPPEARING ACT.

and than my evening ended, with these two ladies talking in German, talking about me, I am sure, it is  for my Goodwill, but what it is. I will find out tomorrow at 9.30

Sunday, 21 July 2013

Nature and Beyond's photostream

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The inner circle

I like Me
I feel unique
the only Me , as I know myself
The inner Me, where nobody is allowed
so the inner ME
where nobody is allowed,
is a very lonely place
Nobody dares to knock
It feels empty
I don't like, the emptiness of
my inner self
to swallow ME
the awkward,
Show off self
May be one day
I'll make them sit
the inner empty self and
outer showoff self
over a cup of coffee
or wine
and allow them to come out
and compromise
for once
for ME





I am happy


I am happy for the life I have
without trying, and
seeing how it gave me so much
opportunity to become
whatever I wanted,
but not  to become what people
wanted of ME

I choose

I choose to believe in stuff
and choose to become a unbeliever
what suits me , where it suits me
to make an easy situation tough

Monday, 8 July 2013

खाली घोंसला




खाली घोंसला


खाली  घोंसला  है तैयार  मेरे रहने को
उम्र बीत जाती है , एक एक तिनका जोडते
बिछाते, हटाते ,ओढ़ते
कभी डरा कर समझाते  बच्चो  को
कभी खुद डर  कर  समझ जाते
एक पल भी दूर न जाने देने की चाह  में
इतनी दूर भेज देते की कोई लौटे भी तो कैसे?
पर जिंदगी  है तो इंतज़ार भी है।।। है न ???

जिंदगी  , एक गर्म हवा की तरह बाँध लेती है
कुछ भी नहीं कहती, सिर्फ जीती रहती है
कैसी  चाह , किसकी मर्जी ,कितनी  किस्मत
रोज तोल -टटोल  कर ,हमारा हाल पूछती है
वक़्त,चुप-चाप ऊँघता ,कभी खैय्नी की तरह पिसता
कभी दांतों तले दबा कर थूक देता है हमको .....है न ???

और हम ??????
और हम??  क्या कहूं ? किस खोज में
क्या समझने की धुन में
किस किस से मिलते बिछुड़ते
कहाँ से कहाँ पहुँच जाते है
और थोप देते हैं अपनी रुसवाई
 किस्मत के हाँथों  में .......है न???

किस्मत भी क्या चीज़ है
सोचो ?
क्या सोचती है किस्मत की कितनी
लाचारी में सोंची  जाती है वो अक्सर
"किस्मत " में  येही लिखा था ...
कह कर रोज हम किस्मत को
अपने सामने बड़ा बनातें  है
और स्वयं को कितना छोटा  ..... है न ??

खैर बात थी खाली घोंसले की
और दूर तक चली आइ , बहुत दूर
मेरे दिल के पास. जो दुनिया से अलग
मुझसे अलग , सबसे अलग  ,मुझमे धडकता है
मुझको कहता है की यह खाली  घोंसला
यादों से भरा है ... है न. ????







 

Thursday, 4 July 2013

एक सपना

हर बार तुमको छूते ही
हर बार तुम्हारा दूर हो जाना
हम दिल को कब तक समझाए
हर बार सपनो में तुम्हारा आना


 

Tuesday, 2 July 2013

एक आस

एक आस यूँ भी सही
की खुद से समझौता कर पाती मैं
 

Thursday, 27 June 2013

तुम और मैं

न दी आवाज़ तुमने, शायद भूल बैठे हो
हमारे सपनो मे  भी आना छोड़ बैठे हो 

तुम और मैं

तुम्हारी और मेरी राहों में बस फ़र्क  इतना है
तुम काँटों पर चलते हो,मैं काँटों पर सोती हूँ                  

Monday, 24 June 2013

 दिल आज भरा भरा सा क्यूँ है ?
रात आँखों ने तो जम कर बरसात की थी


 
होती रहे  शाम अब  जिंदगी की
बचपन भी युहीं सुबह कहीं  चला  गया ......





कुछ शब्द

जब भी तुमको, कुछ  लिखने को
चलती हैं मेरी उँगलियाँ
कागज पर  ,शब्द, खडे हो  कर
 मुझसे पूछते  हैं
यह क्या लिखा? यह क्यों लिखा?
फिर लिखना, फिर काटना, फिर छोड़ देना
फिर  कभी तुमको लिख न पाना
कभी तुमको कह न पाना
बिना कहे रह भी न पाना
कितना असहनीय है
कितना मुश्किल है
शब्दों और भावों का यह  कलह






Tuesday, 18 June 2013

तुम और मैं दूर निकल आए हैं
तुम नयी राहों में , मैं नए ख्वाबों में



 

Monday, 17 June 2013

प्यार मुझसे तुम ऐसा करो

प्यार मुझसे तुम ऐसा करो
जैसे सांस लेते हो तुम, बिना जाने

दूर तक एहसासों का बादल है
कहीं उड़ न जाए बिना  बरसे
 

Tuesday, 11 June 2013

तन्हाई

"तन्हाई" बड़ी लाचारी में  मेरे पास आई है
मेहमान बनी है मेरी , घर से निकालूँ  कैसे?

Monday, 10 June 2013

तलाश (randomites)



जब जान जाउंगी खुद की मंजिल मैं
साथ तुमको भी ले जाऊं शायद

इंतज़ार करती रही उम्र भर लेकिन
दिल ने फिर कभी मुझसे बात न की

लगता था डर मुझे अंधेरे से
अँधेरा खुद भी रौशनी से डरा डरा सा  मिला

अदावत कर ली दुनिया की बनावट से
चलो अब चिडयों के घर में बसेरा बनाएं

मौत आती नहीं, जिंदगी जाती नहीं
रूह युहीं ठहर ठहर के बेज़ार हुई



Wednesday, 5 June 2013

मेरा साया

साया है मेरा रूठा सा,कहाँ तक जाएगा ?
होगी रात, जो गहरी,डर के लौट आएगा ....

Saturday, 1 June 2013

जाने कौन? कब? किधर से गया है ??????

कब से है, खामोश, फिजा चाँद और तारे भी मौन हैं
यह महिना भी धीरे से मुहँ छुपाए उतर सा गया है
मेरे मन में एक अजीब सी खलबली मचा कर
जाने कौन?  कब? किधर से गया है ??????

Tuesday, 28 May 2013

प्रक्रति का नियम

डाल से टूट कर गिरा आम का पीला पत्ता
प्रक्रति का नीयम है यह , पापा ने कहा था

लगाता है माली, छोटे से पौधे को
अपने ही छोटे से बगीचे में
और फिर दे देता है जमाने को
की किसी और की धुप में खिले
पलती है कहीं, बढती  हैं कहीं
और लोग आने- जाने में
कभी रुक कर कभी चल कर
कभी उस एक पीपल के पेड़ तक
बस उस एक पीपल के पेड़ तक और
आते जाते , कभी रुकते, कभी थकते
मंजिल तक पहुचने की धुन में
भूल जाते हैं उस पौधे को जो
कई बार, घर ,आँगन महकाती
खुद ही अपना गंध भूल जाती है
और जब लोग  अपनी निरंतर यात्रा से थक जाते हैं
तो युहीं  आदतन लौटते  घर के पौधे को यह कह कर समझाते हैं
की अभी उनको और दूर जाना है
की अभी उनको वापस नहीं लौटना
घर के आँगन में फैला हुआ पौधा जड़ों समेत,
झड़ते हुए पतों को समेट
मन को यह कह कर समझाती है
की प्रक्रति का नियम है यह पापा ने कहा था

डाल  से टूट कर गिरता है जब पीला पता
प्रक्रति का नियम है यह, समझती है अब










Friday, 24 May 2013

तुझसे उलझ गया 


इस उलझन भरी दुनिया में
तेरी सुलझी हुई प्रीत है 
तेरी सुलझी हुई प्रीत में 
मन मेरा कैसे तुझसे उलझ गया 

Monday, 20 May 2013

बड़ी मुश्किल से सुलाया है,


खून का कतरा है , दिल से बहा जाता है 
तुझसे लिपट कर ,रोने को दिल चाहता है 

मैं जो बर्बाद रहूँ दिल भी आबाद क्यूँ हो?
रह रह कर यूँ , तू मुझको याद आता है 

दिल है नादान, इसका तो कसूर भी नहीं 
बदलती है दुनिया, यह सहमा खड़ा रह जाता है 

अब न लौट कभी , न मेरी यादों में  ही आ 
दिल को समझा कर बड़ी मुश्किल से सुलाया है,




Sunday, 19 May 2013

चाँद



आज फिर देर तक जगना चाँद 
आज फिर उदास सितारों ने घेरा है. 

Friday, 17 May 2013



दिल से क्या पूछूँ की उसे क्या मिला???
तेरे जाने के बाद उसे है सिर्फ मुझसे गिला      

Thursday, 9 May 2013

तुमको रोक पाने की धुन में
खुद से दूर निकल आई हूँ  (वंदना )

Monday, 6 May 2013

"दिल" कभी तो मुस्करा के मिल हमसे

"दिल" कभी तो मुस्करा के मिल हमसे
क्यूँ कभी  बेजार रहता है , कभी बर्बाद  रहता है ..(वंदना)

Thursday, 2 May 2013

आएना

आएना

आयने के उस पार  कुछ बीते लम्हे हैं सुख के और दुःख के
आयने  के इस पार ,आँखों में बसे हैं अधूरे से सपने 

बाँहों में छोड़ रखा है…

खुदी खुद से  जोर लिया था तुमको
अब खुदी तुमको आजाद बाँहों में छोड़ रखा है… 

Sunday, 28 April 2013

क्यूँ न ऐसी मोहबत की उम्मीद करूँ 



क्यूँ न ऐसी मोहबत की उम्मीद करूँ
जो मेरे दिल की तरह पाक- साफ़ हो

इंसान ही तो हूँ कोई परिंदा नहीं
जख्म -ए -जिगर फिर क्यूँ आजाद हो

ढलती है शाम ,पर ढ़लने से पहले
सौंप जाती है मुझे रात की आगोश को

हूँ मैं खुश! की ,दिल भी है दर्द भी
वर्ना  मुर्दों में ही अपनी तलाश हो



Thursday, 25 April 2013

randomites

"रात" उठ के तकिये से सुबह के पास चली
दिल का दर्द भी सुरमई बना तुमको ढूंढता है

बादलों ने घेरे हैं कुछ लोग आसमान में
टूट के बरस जाते तुम तो अच्छा  होता

दिन के उगने और सोने के बीच
हर  लम्हा कई साल जिया करता है


Friday, 5 April 2013

 अक्सर

रोज एक नयी सुबह को "कल" में बदलती हूँ
"नयी बातों" को  पुरानी करती रहती  हूँ मैं अक्सर

टूटी चूड़ियों,में भी कैसे समां जातीं हैं यादें
उन यादों को धीरे से बिटोरती  हूँ  अक्सर

समुन्द्र की तेज लहरों सा मचल जाता है जीवन
हल्के से साँसों को धुप दिखाती हूँ अक्सर

साल का सिर्फ एक दिन  मुययन  किया है तुमने
तुमसे  मिलने की ख्वाइश में साल निकल जाता है अक्सर







not bad banna......

मदहोश मुसाफिर, हूँ, फिर भी
होश में "दिन-रात" मुझे उठाते हैं

पीतीं हूँ जहर-ए -शराब फिर भी
लोगों की जेहरिली आँखों से डरती हूँ

मुझको मालूम है तुम्हारी याद मेरी दुश्मन है
फिर भी रोज उसको प्यार से पहलु में सुलाती हूँ

कैसी दुश्मन है शराब, फिर भी ए  दोस्त
तेरी याद, तुझसे दूर,पर  मेरे पास लाती है

मै  कल  उठू, और सोंचू की ये क्या लिखा
दिल, दर्द, दिमाग और शराब साथ गाती है





so end of may.. paris disneyland

end of june scotland

end of sept. india

end of dec. lapland

end of feb. cayman island....................... not bad banna.

Friday, 22 March 2013

आदतें नहीं बदलतीं 

दर्द की आदत सी है, बिना दर्द न जिया जाएगा
एक उम्र गुजर जाती  है,आदतें नहीं बदलतीं 

एक आस है,जो जीती है, मरती रहती है 

रौशनी जलती है सूरज भी जला जाता है
चांदनी चिढ़ती  है, चाँद भी  चुभा जाता है

तेरे आने और मुझसे मिलने के बीच
एक आस है,जो जीती है, मरती रहती है 


आवाज दिल के

तेरी याद आती है! छेड़ जाती है  साज दिल के
तनहाइयों में सुनती रहती  हूँ आवाज दिल के

हालातों के साथ 

कुछ पनो ! कुछ किताबों और कुछ ख्यालों के साथ 
मेरा दिल भी बंद पड़ा है हालातों के साथ 

Monday, 18 March 2013

प्यार क्या है??


प्यार 

प्यार क्या है??

अनूठा प्यार 
जानते हैं न ??? हम सब
मिलता है कई बार, कई रूप में 
राह में,जीवन के 
सोचतें है अक्सर हाँ बिलकुल पता है 
सच में पता है , कहीं तो पढ़ा है 
क्या सच , जानती हूँ मैं ? की प्यार क्या है ?
पर वो अजीब सी उलझन क्या है ?
जो गले में संकोंच बन कर बैठती है 
शब्दों को जिह्वा पर रखती है 
पर निकालने  नहीं देती 
कंठ में एक बीमार बैचैनी 
कहती है, फिर चुप रहती है 
पूछते हैं लोग, कई बार 
क्या तुम्हे मुझसे प्यार है???
सरल वाकया है न ?
फिर मोहर क्यूँ मांगता है जमाना ?
पाक प्रेम का एक नहीं है  ठीकाना
वो इसीसे, उससे , सबसे करता है प्यार
कहता नहीं है, आँखों से बोलता है
दो मीठे बोल,
लोग करतें हैं एहसासों का मोल-तोल
पर अनकहे  शब्दों की भी व्याख्या होती है क्या???
और बोल देने भर से प्यार बढ़ जाता है क्या????
अनूठा प्यार
जानते हैं न ??? हम सब






Friday, 15 March 2013

Mithoo got in accident again.shattered he was when he called me in the evening.i am just so sorry and so drunk but still typing, that tells it all,you need just your brain working to be alive.nothing matters if the heart stops....what is the big word resuscitate . Ya exactly. God bless you have made the spelling correction.




Oh god if you are really there please take care of my kids....please.

Thursday, 14 March 2013

तुम पर


जानती हूँ मैं, की जो आया है वो जायगा ही
फिर क्यूँ  अनकहा सा प्यार उमड़ आता है तुम पर

तन है एक ऐसा??.. अनुभव !



तन है एक ऐसा??.. अनुभव !
जिसमे हम दिन -रात, सुबह- शाम करतें हैं


रूह का पड़ाव है!कल इसे कहीं जाना है
आज भर हम -तुम  जीते और मरते हैं

रिवाजों और संस्कृति का बोझ है दुनिया पर
बोझिल मन बेचारा चुपचाप  झेलता रहता है

अच्छे- बुरे का तराजू है समाज भी
स्वम  को नहीं, और , सबको तौलता रहता है

लोग आते हैं पास मेरे, फिर कहीं खो से जातें है
मैं और मेरा पागल मन बाट  सबकी जोहता है

एकांकी मन मेरा! मुझमे मुझको खोजता है
इससे ! उससे सबसे यही  कहता है

कभी मिले वो  तो मिलाना मुझे भी!
कभी दीखे वो तो दिखाना मुझे भी











Wednesday, 6 March 2013

चाँद भी चुभा जाता है


रौशनी जलती है सूरज भी जला जाता है
चांदनी चिढ़ती  है, चाँद भी  चुभा जाता है

Thursday, 28 February 2013

आहों को जगह दी है .....

दिल में हल्की सी सरगोशी हुई है
गम ने आहों को जगह दी है ..........

Monday, 25 February 2013

मैं साथ तुम्हारे रहती हूँ


मैं वो खामोश आवाज़ हूँ
जो हर वक़्त तुममे गूंजती है
मैं वो हाहाकार हूँ
जिसे तुम फुर्सत में कभी सुनोगे
धुल खाती किताबों की पंक्ति में
मैं तुम्हे झांकती हूँ की शायद  आज
तुम मुझको पढोगे
आयने में तुम्हारी आँखे जब
एक काला तिल खोजती है तो
मैं तुम्हारे दिल-ओ -दिमाग की
अनबन सी बन बैठती हूँ 
तुम्हारे होंठ जब मुस्करा कर 
वापस तुम्हारे चेहरे पर लौटते हैं 
तो  मैं उन्हे सहेज कर
साथ अपने रखती हूँ 
तुम्हारी आंखे भीड़ को चीर कर
जब दूर कहीं मुझे खोजतीं हैं
तो मैं तुम्हारी अधूरी सी सांस बन
दिल में एक मीठा सा दर्द बन जाती हूँ
एक भ्रम की दुनिया से परे
तन्हाई में एक हसीं मजमा जमाती
मैं तुम्हारा प्यार हूँ 
मैं साथ तुम्हारे रहती हूँ 






Friday, 22 February 2013

थम सा गया है वक़्त कुछ इस तरह से मेरे लिए

थम सा गया है वक़्त कुछ इस तरह से मेरे लिए

मैं जब सो कर  उठती हूँ तो वक़्त
पाँव के पास मेरे उन्घ्ता दिखाई देता है 

मै दबे पाँव उसके लिए चाय बना लाती हूँ
वक़्त को थाम कर अपने साथ चाय पिलाती हूँ

एक वक़्त है जो साथ मेरे चलता है 
मैं जो रुक जाऊं तो दूर खड़ा रुकता है 

मेरे पैरों पर एक अनदेखी जंजीर है
जो चुभती है , तकलीफ देती है 

वक़्त भी अपनी जंजीरों की गिला करता है 
कैसे दिन रात ! मौसमों में बंधा रहता है 

इतनी ख़ामोशी है की वक़्त की टिक-टिक भी नहीं सुनाई देती
और उसे मेरी दर्द में डूबी हुई तन्हाई भी नहीं दिखती


जाने क्यूँ वक़्त भी नहीं जाता मुझे छोड़ कर
थम सा गया है वक़्त कुछ इस तरह से मेरे लिए

Thursday, 21 February 2013

लहू का रंग लिए।।।।।।।। 

मुदतें हुई कागज़ को तह लगाए
किसी के आंसू थे लहू का रंग लिए।।।।।।।। 

मैं खुद में  मैं हूँ ,और खुदा  मेरा

तुम्हे बताऊँ मैं किस्सा दिल का
नहीं समझते हो तुम ये सौदा दिल का

फ़कत  लैला- मजनू को पढने वालों
मेरा दिल घरोंदा है दर्दे जहाँ का

न कोई मजनू है न फरहाद मेरा
मैं खुद में  मैं हूँ ,और खुदा  मेरा








Tuesday, 19 February 2013

दिन के उगने और सोने के बीच
हर  लम्हा कई साल जिया करता है  
बादलों ने घेरे हैं कुछ लोग आसमान में
टूट के बरस जाते तुम तो अच्छा  होता

रात

"रात" उठ के तकिये से सुबह के पास चली
दिल का दर्द भी सुरमई बना तुमको ढूंढता है.    

मैं तुम्हे भूल जाऊं या न भूला सकूँ कैसे कहूँ 
ये जिद्दी दिल है!देखे इसकी क्या मेहरबानी है।।

Monday, 18 February 2013

यह कहानी


चलो सुनाए जमाने को अपनी यह कहानी 
हम तुम मिल न सके तब भी यह कैसी यादें पुरानी 
मैं तुमसे दूर हूँ यह तो मालूम है
पास तुम भी मेरी यादों के रहा न करो

Wednesday, 13 February 2013

बस एक अधूरापन है दिल को

बस एक  अधूरापन  है दिल को
बस आस लगाए बैठा है
जीवन के जर्जर सीवन को
बस रफू लगाता रहता है
एक बखिया,उधेरा तुम्हारी याद का
कभी फिर  बुना फ़रियाद का
कभी आँख मूंद के पा लिया
कभी सपनो में तुमको खो दिया
बस तुम तक पहुँच सके धरकन
हाँ इसी तलाश में रहता है
बस एक  अधूरापन  है दिल को
बस आस लगाए बैठा है

Randomites kuch yun hi.......


हाँ दिल को छूते थे तुम पर अक्सर भूल जाते थे 
बिखरे दिल बड़ी मुश्किल से सम्भाले जाते   हैं

वो कल जो तुमने लिखी थी कुछ  प्यार भरी  बातें
किताबों से उतर कर पंक्तियाँ , तितलियाँ बन बैठी

सुनो, बड़ी मुददत से एक बात कहनी थी तुमसे
छोड़ो ,जाने दो  अगले जन्मों  में  कह  दूँगी


 

Monday, 11 February 2013

मन तो करता है न

मन तो करता है न
की चाँद को छू सकती मैं
मन तो करता है न
दो -तीन दिन तेरे दिल में रह सकती मैं
मन तो करता है न
दुनिया की रिवाजों से परे
चैन से जी सकती , चैन से मर सकती मैं
मन तो करता है न
दिल के अधूरेपन  को
कभी कभी पूरा कर सकती मैं
मन तो करता है न
कभी तेरे होने या न होने को
कभी खुद को खुद में ही  तलाशती मैं





Saturday, 9 February 2013

Deepti and Sandeep Maken. 8th Feb.2013

It is so upsetting to hear Sandeep Maken's death. I had not met him, just seen him on JDTS reunion, and Deepti's profile.I do not understand, why I am so upset,In my family Madheshwar Bhaiya died on 5th of Feb. 2013. I heard the news on 6th on Mithoo's birthday, still we all went out to have dinner and good time, but here, yesterday, i just opened the Facebook for 5 sec. and read this awful news, it went straight to the heart. I keep seeing Deepti all the time, so young, smiling all the time, what is she going to do......what she will do. It is so heart breaking.  A silent love and prayer is going on and on for you Deepti. Please have faith and peace and courage to deal this awful situation . You are on your own, none of us can feel what you are going through now.

तुम्हारा चेहरा

मेरे जहन में मुस्कराता तुम्हारा चेहरा
मेरे दिन, मेरी रातें, मेरे मौसम बदलता रहता है .....

Wednesday, 6 February 2013

प्यार

क्या प्यार को मालूम है
की कितने दीवाने उसके गम में घूमते हैं ????? (वंदना)

Tuesday, 5 February 2013

कहने को तो दुनिया है बड़ी नेक
हमने ही समझने में शायद ग़लती की होगी .........

एक टीस है अनकही सी

एक टीस है अनकही सी
जाने क्या बोलना चाहती है 
मेरे दिल से निकल कर 
तेरे  दिल तक की दूरी 
बस, पूरी करना चाहती है 
एक टीस  है अधूरी सी
मेरे सीने में फँसी सांस सी
उठती है, चलती है , धडकती है
कुछ कहती न, कुछ सुनती नहीं  पर
जाने क्या बोलना चाहती है ......






Wednesday, 30 January 2013

दोस्ती

इसलिए क्यूंकि दोस्ती रिश्ता है जज्बात का
इसलिए क्यूंकि दोस्ती रिश्ता है अहसास का
दोस्ती का सिर्फ एक ही महजब  है
रूह से महसूस करती है,रिश्ते और रिवाजों का क्या???  (वंदना)




रूह

आज दोजख तो झेलना होगा
रूह की सकून के वास्ते .....

Monday, 28 January 2013

500 blogs

wow, 500 blogs, well done banna.

सपने


मैं थकती पलकों से उतर  कर सपने में घूमा करती हूँ
जब चाँद सो जाता है ,तो तारे अक्सर गीत सुनाते हैं।।।।



नायिका


अपने जीवन की कहानी में  
शुरू से ही नायिका मैं  हूँ 
किस्से जुड़ेंगे मेरे साथ,
और अलग भी  होंगे 
कुछ नियति से, कभी निति से 
और मैं कुछ नहीं  कहूँगी 
हर छोटी ,बड़ी कहानी की अपनी चाह होती है 
और चाहतो से टकराना तो जीवन नहीं 
मेरा जीवन है,  मेरे हिस्से की कहानी
जो जुडती है ,मिलती है,  बिखरती है
हंसती -रोती  भी रहती हैं
अपने हर किस्से को जहन में रखती हूँ
अपने आसुओं के झलकते प्रितिबिम्ब
से उसे  गिरने  भी नहीं देती
अपने ठहाकों के शोर में
दबने भी नहीं देती
अपने जीवन की कहानी में  
शुरू से  ही नायिका मैं हूँ 
और  हाँ अंत तक रहूंगी भी .......




Sunday, 27 January 2013

बैचैन रूह


मसरूफ दुनिया के मुसाफिर अक्सर भूल जाते हैं
रूह कितनी बैचनी से  दिन रात किया  करती है।



Thursday, 24 January 2013

प्यार की खुशबू थी,

प्यार की खुशबू थी, साथ चला करती थी 
हवा ने छीन कर , फिज़ा पर  लूटा दी शाएद 

हैं और भी कितने स्याह साए "बन्ना "

हैं और भी कितने स्याह साए "बन्ना "
जहन में  उभरती तस्वीर पर न जा

कितने अरमान लिए उडती है फिजा 
फिजा के दर्द भरे अफसाने पर न जा

दिल तो है लेकिन , जरा बर्बाद सा
तू, अपने दिल के बहकावे पर न जा


Tuesday, 22 January 2013

मेरा नाम मोहब्बत है



अब तुम कुछ भी, मुझसा नहीं लिखते
सिर्फ उसकी बातें,उसकी हंसी ,उसका रोना
तुम भूल गए  हो शायद 
चलो मैं याद दिलाती हूँ 
मेरा नाम  मोहब्बत है 
और मैं सामने वाली गली मैं रहती हूँ 
गली में आजकल घनघोर घटा छाई है 
सिर्फ उसकी याद,उसका दिल ,उसका भ्रम 
तुम भूल गए हो  शायद 
चलो मैं याद दिलाती हूँ 
गली की नुकड़ पर एक घाव अधूरा था 
कभी तुमने दिया, कभी पूरा किया, कभी जाने दिया
अगर खटखटा सको, तो दरवाजे तक जरुर आना 
तुम भूल गए हो  शायद 
चलो मैं याद दिलाती हूँ 
मेरा नाम मोहब्बत है 
और मैं सामने वाली गली में रहती हूँ 

















Monday, 21 January 2013

थोड़ी मस्ती उधार देनी है

थोड़ी मस्ती उधार देनी है इसे
जिंदगी बड़ी उदास सी  घुम रही है यहीं।

Thank you for this honour


एक उम्र भर की तलाश

खुद से निकल मैं सुनती रही
तुम्हारी और अपनी बात
मुँह से निकलते शब्द
बनते रहे शवेत  भांप
जैसे एक ठिठुरते कोने में
रात ने भी  काटी हो एक रात
जैसे कंठ से निकलते ही
शब्द खो देते हों खुद की पहचान
जैसे कुछ घंटों में मिट जाती हो
एक उम्र भर की तलाश
ऐसे ही मैं खुद से निकल कर
सुनती रही तुम्हारी और अपनी बात









Sunday, 20 January 2013

अकेली सुबह

कितनी अकेली थी वो सुबह
जब हम-तुम जा बैठे थे उसके साथ
इतनी ठण्ड की जब बातें भी
मुंह से भांप बन कर उड़ जाती हों
और यादें , मन की गर्मी से निकल
बातों में बिखर जातीं हों
कितने बरस लांघने को हम-तुम थे तैयार
और फिर समेटते  ही रहे
हम , अपनों को अपने साथ
कितने पल बीते ,कितनी बीतीं बात

कितनी अकेली थी वो सुबह
जब हम-तुम जा बैठे थे उसके साथ