Monday, 28 January 2013

नायिका


अपने जीवन की कहानी में  
शुरू से ही नायिका मैं  हूँ 
किस्से जुड़ेंगे मेरे साथ,
और अलग भी  होंगे 
कुछ नियति से, कभी निति से 
और मैं कुछ नहीं  कहूँगी 
हर छोटी ,बड़ी कहानी की अपनी चाह होती है 
और चाहतो से टकराना तो जीवन नहीं 
मेरा जीवन है,  मेरे हिस्से की कहानी
जो जुडती है ,मिलती है,  बिखरती है
हंसती -रोती  भी रहती हैं
अपने हर किस्से को जहन में रखती हूँ
अपने आसुओं के झलकते प्रितिबिम्ब
से उसे  गिरने  भी नहीं देती
अपने ठहाकों के शोर में
दबने भी नहीं देती
अपने जीवन की कहानी में  
शुरू से  ही नायिका मैं हूँ 
और  हाँ अंत तक रहूंगी भी .......




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