Monday, 25 February 2013

मैं साथ तुम्हारे रहती हूँ


मैं वो खामोश आवाज़ हूँ
जो हर वक़्त तुममे गूंजती है
मैं वो हाहाकार हूँ
जिसे तुम फुर्सत में कभी सुनोगे
धुल खाती किताबों की पंक्ति में
मैं तुम्हे झांकती हूँ की शायद  आज
तुम मुझको पढोगे
आयने में तुम्हारी आँखे जब
एक काला तिल खोजती है तो
मैं तुम्हारे दिल-ओ -दिमाग की
अनबन सी बन बैठती हूँ 
तुम्हारे होंठ जब मुस्करा कर 
वापस तुम्हारे चेहरे पर लौटते हैं 
तो  मैं उन्हे सहेज कर
साथ अपने रखती हूँ 
तुम्हारी आंखे भीड़ को चीर कर
जब दूर कहीं मुझे खोजतीं हैं
तो मैं तुम्हारी अधूरी सी सांस बन
दिल में एक मीठा सा दर्द बन जाती हूँ
एक भ्रम की दुनिया से परे
तन्हाई में एक हसीं मजमा जमाती
मैं तुम्हारा प्यार हूँ 
मैं साथ तुम्हारे रहती हूँ 






No comments: