Friday, 5 April 2013

 अक्सर

रोज एक नयी सुबह को "कल" में बदलती हूँ
"नयी बातों" को  पुरानी करती रहती  हूँ मैं अक्सर

टूटी चूड़ियों,में भी कैसे समां जातीं हैं यादें
उन यादों को धीरे से बिटोरती  हूँ  अक्सर

समुन्द्र की तेज लहरों सा मचल जाता है जीवन
हल्के से साँसों को धुप दिखाती हूँ अक्सर

साल का सिर्फ एक दिन  मुययन  किया है तुमने
तुमसे  मिलने की ख्वाइश में साल निकल जाता है अक्सर







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