Friday, 30 August 2013

अब कुछ ऐसा कहें की न कहें


चाँद भी आवारा सा बादल बादल फिरता रहा 
सूरज कभी निकल पेड़ों से सागर में गिरता रहा 
मेरी दास्ताँ सुन लहर ,कैसे तनहा तनहा  मचलती रही 
मैं बैठी रहीं तेरी याद में साया आवारा फिरता रहा ,,,,,,





 

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