Thursday, 24 January 2013

प्यार की खुशबू थी,

प्यार की खुशबू थी, साथ चला करती थी 
हवा ने छीन कर , फिज़ा पर  लूटा दी शाएद 

हैं और भी कितने स्याह साए "बन्ना "

हैं और भी कितने स्याह साए "बन्ना "
जहन में  उभरती तस्वीर पर न जा

कितने अरमान लिए उडती है फिजा 
फिजा के दर्द भरे अफसाने पर न जा

दिल तो है लेकिन , जरा बर्बाद सा
तू, अपने दिल के बहकावे पर न जा


Tuesday, 22 January 2013

मेरा नाम मोहब्बत है



अब तुम कुछ भी, मुझसा नहीं लिखते
सिर्फ उसकी बातें,उसकी हंसी ,उसका रोना
तुम भूल गए  हो शायद 
चलो मैं याद दिलाती हूँ 
मेरा नाम  मोहब्बत है 
और मैं सामने वाली गली मैं रहती हूँ 
गली में आजकल घनघोर घटा छाई है 
सिर्फ उसकी याद,उसका दिल ,उसका भ्रम 
तुम भूल गए हो  शायद 
चलो मैं याद दिलाती हूँ 
गली की नुकड़ पर एक घाव अधूरा था 
कभी तुमने दिया, कभी पूरा किया, कभी जाने दिया
अगर खटखटा सको, तो दरवाजे तक जरुर आना 
तुम भूल गए हो  शायद 
चलो मैं याद दिलाती हूँ 
मेरा नाम मोहब्बत है 
और मैं सामने वाली गली में रहती हूँ 

















Monday, 21 January 2013

थोड़ी मस्ती उधार देनी है

थोड़ी मस्ती उधार देनी है इसे
जिंदगी बड़ी उदास सी  घुम रही है यहीं।

Thank you for this honour


एक उम्र भर की तलाश

खुद से निकल मैं सुनती रही
तुम्हारी और अपनी बात
मुँह से निकलते शब्द
बनते रहे शवेत  भांप
जैसे एक ठिठुरते कोने में
रात ने भी  काटी हो एक रात
जैसे कंठ से निकलते ही
शब्द खो देते हों खुद की पहचान
जैसे कुछ घंटों में मिट जाती हो
एक उम्र भर की तलाश
ऐसे ही मैं खुद से निकल कर
सुनती रही तुम्हारी और अपनी बात









Sunday, 20 January 2013

अकेली सुबह

कितनी अकेली थी वो सुबह
जब हम-तुम जा बैठे थे उसके साथ
इतनी ठण्ड की जब बातें भी
मुंह से भांप बन कर उड़ जाती हों
और यादें , मन की गर्मी से निकल
बातों में बिखर जातीं हों
कितने बरस लांघने को हम-तुम थे तैयार
और फिर समेटते  ही रहे
हम , अपनों को अपने साथ
कितने पल बीते ,कितनी बीतीं बात

कितनी अकेली थी वो सुबह
जब हम-तुम जा बैठे थे उसके साथ